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Tuesday, March 17, 2026
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TMC ने हुमायूं कबीर को दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता, ‘बाबरी मस्जिद बनाने’ वाले बयान को लेकर हुई कार्यवाई

टीएमसी ने विधायक हुमायूं कबीर को बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का विवादित ऐलान करने पर पार्टी से निलंबित कर दिया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्कं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी हलचल मचाते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने बागी नेता और विधायक हुमायूं कबीर को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया है। यह सख्त कार्रवाई कबीर के हाल ही में दिए गए विवादित बयान के मद्देनजर की गई है, जिसमें उन्होंने बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने का ऐलान किया था। टीएमसी ने इस बयान को प्रदेश के सांप्रदायिक सौहार्द पर सीधा हमला और माहौल बिगाड़ने की सुनियोजित कोशिश बताते हुए कड़ा रुख अपनाया है।

BJP की मदद से माहौल गर्माने का आरोप

पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि हुमायूं कबीर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर धार्मिक तनाव बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए थे। पार्टी के वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हाकिम ने निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई अंतिम चेतावनी के बाद की गई है। हाकिम ने कड़े शब्दों में कहा, कबीर लगातार पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयान दे रहे थे। हमने उन्हें पहले तीन बार सावधानी बरतने के लिए कहा गया था, पर वह नहीं माने और अपनी गतिविधियां जारी रखीं। अब टीएमसी का उनसे कोई संबंध नहीं रहेगा।

विवाद की जड़: 6 दिसंबर को बाबरी निर्माण का ऐलान

विवाद की असली वजह हुमायूं कबीर का वह बयान है, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक मंच से 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण की आधारशिला रखने का ऐलान किया था। 6 दिसंबर वही तारीख है, जिस दिन 33 साल पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी।पार्टी नेतृत्व ने विधायक के इस ऐलान को धार्मिक ध्रुवीकरण की सुनियोजित कोशिश माना है। टीएमसी का मानना है कि ऐसे संवेदनशील बयान से राज्य की शांति, सद्भाव और सामाजिक संतुलन को खतरा पैदा हो सकता था।

हाई कोर्ट में मामला लंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए, कलकत्ता हाई कोर्ट भी इस पर संज्ञान ले चुका है। देबरा विधायक हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की टिप्पणी से जुड़ी एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर कलकत्ता हाई कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। पार्टी की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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