नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। श्राद्ध पक्ष के दौरान गया में पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान की परंपरा प्रसिद्ध है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि गुजरात के पाटन जिले में स्थित सिद्धपुर, जिसे ‘मातृगया’ भी कहा जाता है, विशेष रूप से माताओं के श्राद्ध और पिंडदान के लिए प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। सदियों पुरानी इस परंपरा के तहत यहां केवल मां के मोक्ष के लिए पिंडदान किया जाता है। इस धार्मिक स्थल की मान्यता है कि यहां किए गए कर्म से मां को परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कपिल मुनि की तपोभूमि, जहां माता देवहूति को मिला मोक्ष
पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहीं कपिल मुनि ने अपनी माता देवहूति को ज्ञान, ध्यान और भक्ति का मार्ग दिखाया था। मां के मोक्ष हेतु की गई कपिल मुनि की कठोर तपस्या के कारण यह भूमि ‘मातृगया’ के नाम से विख्यात हुई।
अदृश्य सरस्वती नदी, जहां स्नान से होता है मातृ ऋण से मुक्ति
सिद्धपुर से होकर बहने वाली सरस्वती नदी को भी अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि यह नदी पाताल से प्रवाहित होती है और इसमें स्नान करने तथा पिंडदान करने से मां के प्रति किया गया हर कर्म सफल होता है।
यहां नहीं होता पितरों का तर्पण, केवल माताओं के लिए विशेष विधान
भारत में गया, हरिद्वार और काशी जैसे स्थानों पर पितृ पक्ष में पिंडदान की परंपरा है। लेकिन सिद्धपुर एकमात्र ऐसा तीर्थ है, जहां पिता नहीं, केवल मां के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। यह परंपरा न सिर्फ अनूठी है, बल्कि मां के महत्व को सर्वोच्च स्थान देने वाली संस्कृति की मिसाल भी है।
महापुरुषों ने भी किया मातृ श्राद्ध
इतिहास साक्षी है कि भगवान परशुराम और कपिल मुनि जैसे महापुरुषों ने भी यहीं आकर अपनी माताओं का पिंडदान किया था। आधुनिक युग में इस परंपरा को कई प्रसिद्ध हस्तियों ने निभाया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक गुरु गोलवलकर ने अपनी मां का पिंडदान यहीं किया था। बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन भी अपनी माता तेजी बच्चन के श्राद्ध कर्म के लिए सिद्धपुर आए थे।
श्रद्धालुओं की बढ़ रही आस्था, पितृ पक्ष में उमड़ती भीड़
हर वर्ष पितृ पक्ष के दौरान हजारों श्रद्धालु देशभर से सिद्धपुर पहुंचते हैं। जहां उनकी केवल एक ही भावना होती है कि, मां की आत्मा को शांति और मोक्ष मिले। यहां किया गया श्राद्ध प्रत्यक्ष पुण्य फलदायक माना जाता है।
‘मातृदेवो भव’ की भावना को साकार करता है सिद्धपुर
जहां भारतीय संस्कृति में पिता के श्राद्ध को व्यापक रूप से मनाया जाता है, वहीं मां के लिए समर्पित यह तीर्थ, उस भावना को जीवंत करता है जिसमें कहा गया है कि, “मातृदेवो भव” मां ही देवी है, मां ही मुक्ति का द्वार है।
कैसे पहुंचे सिद्धपुर?
स्थान: पाटन जिला, गुजरात
निकटतम रेलवे स्टेशन: सिद्धपुर जंक्शन
निकटतम हवाई अड्डा: अहमदाबाद
सर्वोत्तम समय: पितृ पक्ष (भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक)
इन उदाहरणों से सिद्ध होता है कि सिद्धपुर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मातृभक्ति का एक जीवंत प्रतीक है, जहां सिर्फ मां के लिए श्राद्ध करने की यह परंपरा सदियों से जीवित है और समय के साथ इसकी मान्यता और श्रद्धा भी बढ़ती जा रही है।




