नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । रांची में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए वनडे मुकाबले में विराट कोहली पूरी तरह छा गए। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 120 गेंदों की अपनी बेहतरीन पारी में 11 चौकों और 7 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 135 रन ठोके। कोहली की इस शानदार इनिंग के दम पर भारत ने 8 विकेट खोकर 349 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका की टीम 332 रन पर रुक गई और भारत को 17 रनों से जीत मिल गई। कोहली को उनके दमदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया।
मुकाबले के बाद कोहली ने उन खबरों पर भी विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि वह संन्यास से लौटकर दोबारा टेस्ट क्रिकेट खेल सकते हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया को 0–2 से मिली हार के बाद ऐसी चर्चाएं तेज थीं। लेकिन कोहली ने साफ कर दिया कि वह फिलहाल सिर्फ एक ही फॉर्मेट में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जब भी मैदान पर उतरते हैं, अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं।
क्या बोले विराट कोहली ?
प्रेजेंटेशन सेरेमनी में विराट कोहली ने बताया कि इस मैच में उतरना उनके लिए बेहद खास रहा। उन्होंने कहा कि शुरुआती 20–25 ओवरों तक विकेट बल्लेबाजी के लिए बढ़िया था, हालांकि बाद में पिच थोड़ी धीमी पड़ गई। कोहली के मुताबिक वह मैदान पर उतरने के बाद बिना किसी अतिरिक्त दबाव के बस गेंद को देखने और शॉट खेलने पर ध्यान केंद्रित करते रहे। उन्होंने कहा कि जब बल्लेबाज को अच्छी शुरुआत मिल जाती है, तो पिछले कई सालों का अनुभव खुद-ब-खुद काम आने लगता है, जिससे वह परिस्थिति को समझकर अपनी पारी को आगे बढ़ा पाता है।
कोहली ने आगे कहा कि वह जरूरत से ज्यादा नेट सेशन में यकीन नहीं रखते, क्योंकि उनके लिए खेल का सबसे बड़ा हिस्सा मानसिक तैयारी है। उन्होंने बताया कि रोजाना की फिटनेस उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी है और इससे उन्हें खेल में तेज बनाए रखने में मदद मिलती है। उनके अनुसार, जब तक शरीर और दिमाग दोनों चुस्त रहते हैं और खेल का आनंद मिलता है, तब तक वह जानते हैं कि वह पूरी तरह तैयार हैं। कोहली ने कहा कि अगर आप खुद को मैदान में तेज दौड़ते, शॉट पर तुरंत प्रतिक्रिया देते और खेल को अच्छी तरह महसूस करते हुए देख पाते हैं, तो यह भरोसा बढ़ जाता है कि मैच शुरू होने पर आप रन जरूर बनाएंगे।
”अब भी उतनी ही भूख बाकी है?”
जब कोहली से पूछा गया कि क्या उनके भीतर अब भी उतनी ही भूख बाकी है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा “बिल्कुल, मैंने हमेशा यही कहा है जहां भी जाता हूं, 120 प्रतिशत लेकर जाता हूं।” उन्होंने बताया कि रांची वे इसलिए समय से पहले पहुंचे ताकि माहौल और पिच की परिस्थितियों को ठीक से समझ सकें। कोहली ने दो दिन के सेशन में दिन के समय दो बार और शाम को एक बार बैटिंग अभ्यास किया और खुद को पूरी तरह तैयार कर लिया। विराम को लेकर उन्होंने कहा कि मैच से एक दिन पहले उन्होंने आराम किया, क्योंकि 37 की उम्र में रिकवरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कोहली ने आगे कहा कि वह खेल को मानसिक रूप से लगातार विजुअलाइज करते रहते हैं। जब उन्हें महसूस होता है कि उनका गति, तीव्रता और फील्डरों को चुनौती देने का वही जुनून कायम है, तब उन्हें भरोसा हो जाता है कि वह सही मानसिक स्पेस में हैं।
क्या आगे भी एक ही फॉर्मेट खलेंगे कोहली ?
जब विराट को पूछा गया कि क्या वह आगे भी केवल एक ही फॉर्मेट में नजर आएंगे, तो उन्होंने साफ कहा “हां, यही मेरा रास्ता रहेगा। फिलहाल मैं सिर्फ एक फॉर्मेट में ही खेलता हूं और वही जारी रहेगा।” कोहली ने आगे बताया कि 300 से ज्यादा वनडे खेलते हुए उन्होंने 15–16 वर्षों का अनुभव इकट्ठा किया है। उनके मुताबिक जब खिलाड़ी लगातार खेल से जुड़ा रहता है और प्रैक्टिस में गेंद को अच्छा टाइम करता है, तो उसकी सजगता और रिदम दोनों स्वाभाविक रूप से बेहतर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जब आप नेट्स में डेढ़–दो घंटे तक बिना रुके बल्लेबाज़ी कर सकते हैं, आपकी फिटनेस मजबूत है और मानसिक रूप से भी आप तैयार महसूस करते हैं, तो खेल अपने आप सही दिशा में चलता रहता है। कोहली ने यह भी कहा कि अगर कभी फॉर्म गिरती है तो मैच खेलने की जरूरत होती है, लेकिन जब बल्लेबाज गेंद को साफ हिट कर रहा हो और खेल का मजा ले रहा हो, तो वर्षों का अनुभव काफी मदद करता है और चीजें सामान्य रूप से बेहतर होती चली जाती हैं।





