नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और उनकी अलग रह रहीं पत्नी हसीन जहां के विवाद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हसीन जहां ने कोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत में मामला दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों के दावे और आरोपों की कानूनी जांच शुरू की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हसीन जहां की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अलगाव के बाद मोहम्मद शमी से गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की थी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने हसीन जहां की याचिका पर सुनवाई में इस मामले में क्रिकेटर मोहम्मद शमी और पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों पक्षों से विस्तृत विवरण पेश करने को कहा है।
वर्तमान गुजारा भत्ता काफी अच्छा खासा- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिका सुनवाई के दौरान हसीन जहां को मोहम्मद शमी की ओर से वर्तमान गुजारा भत्ते पर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा शमी की पत्नी और बेटी को निर्धारित भत्ता पर्याप्त और संतोषजनक है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
बता दें कि, इससे पहले हसीन जहां ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मोहम्मद शमी को निर्देश दिया था कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां और बेटी को मासिक 4 लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में गुजारा भत्ता दें।
बेटी और पत्नी के लिए तय है गुजारा भत्ता
हाई कोर्ट ने मोहम्मद शमी को आदेश दिया था कि वह हसीन जहां को महीने के 1.50 लाख रुपये और उनकी बेटी को 2.50 लाख रुपये गुजारा भत्ता दें। हालांकि, हसीन जहां ने इसे कम बताते हुए 4 लाख रुपये की कुल राशि अपर्याप्त होने की आपत्ति जताई थी।
वर्तमान तय राशि पर्याप्त नहीं- हसीन जहां
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद हसीन जहां ने कहा था कि भरण-पोषण की राशि पति की आय और सामाजिक स्थिति के आधार पर तय की जानी चाहिए, इसलिए उन्हें वर्तमान निर्धारित राशि पर्याप्त नहीं लगी।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के अनुसार, पति को अपनी पत्नी और बच्चों को वही जीवन स्तर देना होता है जिसका वह स्वयं आनंद लेता है। हसीन जहां ने कहा कि मोहम्मद शमी की शानदार जीवनशैली को देखते हुए 4 लाख रुपये का मासिक गुजारा भत्ता काफी कम है।





