नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भारत में क्रिकेट सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल माना जाता है। भारत में क्रिकेट को चाहने वाले लोगों की संख्या करोड़ों में हैं। सचिन तेंदुलकर भारत में ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाते हैं। भारतीय क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने इंटरनेशल क्रिकेट परिषद (ICC) से एक खास अपील की है। सचिन तेंदुलकर के मन में क्रिकेट के नियम को लेकर एक सवाल खटक रहा है, और वे अंपायर कॉल में बदलाव करना चाहते हैं।
लेकिन उसके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। वो तो चाहते है कि जो यह क्रिकेट का नियम है उसे खत्म ही कर दें। वो ये कर नही सकते है, इस मामले पर पर आईसीसी ही एक्शन ले सकता है या कोई बदलाव कर सकता है। वह अपने बयान को सार्वजनिक कर इस नियम को बदलने की मांग किए है।
क्या होता है अंपायर कॉल सिस्टम?
भारत के दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने हाल ही में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) के नियमों पर सवाल उठाए और कहा कि अंपायर कॉल में बदलाव होना चाहिए। लेकिन इससे पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर अंपायर कॉल है क्या।
दरअसल, 2009 में जब DRS की शुरुआत हुई, तब से “अंपायर कॉल” शब्द क्रिकेट का अहम हिस्सा बन गया। इसका मतलब है, अगर तकनीकी सबूत पूरी तरह साफ नहीं हों और निर्णय संदिग्ध हो, तो मैदानी अंपायर का मूल फैसला बरकरार रहता है। यानी संदेह की स्थिति में हमेशा अंपायर के फैसले को ही मान्यता दी जाती है।
सचिन तेंदुलकर ने पहले भी अंपायर कॉल को हटाने के बारे में अपनी राय व्यक्त कर चुके है। अब उन्होंने एक बार फिर इस बारे में आवाज उठाई है और कहा है कि इसे छोड़ देना ही बेहतर होगा।
‘अंपायर का भी खराब दौर आता है’- सचिन तेंदुलकर
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने अंपायर कॉल को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए तेंदुलकर ने कहा कि अगर वह मौका पाते तो DRS नियम में बदलाव जरूर करते। उन्होंने साफ कहा कि खिलाड़ी अपील इसलिए करते हैं क्योंकि वे मैदानी अंपायर के फैसले से असहमत होते हैं। ऐसे में फैसले को दोबारा उसी अंपायर कॉल पर टिकाना ठीक नहीं है। सचिन के मुताबिक, जैसे खिलाड़ियों का खराब दौर आता है, वैसे ही अंपायर भी गलतियां कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक अगर गलती कर रही है तो वह लगातार गलत ही साबित होगी।
टीमों को क्यों मिलता है संदेह का लाभ
अंपायर कॉल क्रिकेट का वह नियम है जो मैदानी अंपायर के फैसले को अंतिम महत्व देता है। जब कोई टीम डीआरएस का इस्तेमाल करती है और तकनीकी सबूत पूरी तरह साफ नहीं होते, तो अंपायर के फैसले को बरकरार रखा जाता है। खासकर एलबीडब्ल्यू में, यदि गेंद का 50% से कम हिस्सा (बेल्स को छोड़कर) स्टंप्स से टकराता दिखे, तो निर्णय ‘अंपायर कॉल’ माना जाता है। इस स्थिति में चाहे अंपायर ने आउट दिया हो या नॉट आउट- फैसला बरकरार रहता है।
दुनिया में एक मात्र खिलाड़ी
बता दें कि, सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के इतिहास में अलग पहचान बनाई है। वह अपनी बल्लेबाजी से किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने की क्षमता और कौशल रखते थे। अपनी इसे छवि के चहते वह ‘मास्टर ब्लास्टर’ कहलाएं। तेंदुलकर ने 664 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 48.52 की औसत से 34,357 रन बनाए। वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। इस दौरान उन्होंने 100 शतक और 164 अर्धशतक लगाए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा हैं। वह शतकों का शतक बनाने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं।





