नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। अभिमन्यु ईश्वरन अब भी अपने टीम इंडिया डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं। इंग्लैंड दौरा उनके लिए बड़ा मौका माना जा रहा था, खासकर जब उन्होंने इंडिया ए के लिए दो मैचों में अच्छी बल्लेबाजी की थी। लेकिन ओवल टेस्ट में एक बार फिर मौका न मिलने से वह बेहद निराश हुए। उनके पिता रंगनाथन परमेश्वरन ईश्वरन ने कहा कि उनका बेटा मानसिक तनाव में है। उन्होंने टीम के कोच गौतम गंभीर से सवाल किया कि आखिर करुण नायर को अभिमन्यु पर तरजीह क्यों दी गई?
बता दें कि अभिमन्यु को 2021 में दो बार टीम में शामिल किया गया, पहले इंग्लैंड सीरीज और फिर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए, लेकिन दोनों बार वह स्टैंडबाय ही रहे। 2022 में बांग्लादेश दौरे पर उन्हें मुख्य टीम में जगह मिली, लेकिन अभी तक उन्हें डेब्यू करने का मौका नहीं मिला है। अभिन्यु ने इंग्लैंड दौरे पर हुए दो मैच में 11 और 80 और 8 और 68 रन बनाए थे।
ओवल टेस्ट में 4 बदलाव, फिर भी नहीं मिला मौका
इंग्लैंड दौरे के दौरान टीम इंडिया ने आखिरी टेस्ट में प्लेइंग इलेवन में 4 बदलाव किए, लेकिन अभिमन्यु ईश्वरन को फिर भी मौका नहीं मिला। मीडिया से बातचीत में उनके पिता रंगनाथन परमेश्वरन ईश्वरन का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने सवाल किया, “जब अभिमन्यु लगातार रन बना रहा है, तो उसकी जगह करुण नायर को क्यों चुना गया?”
रंगनाथन ने कहा, “मैं अब दिन नहीं, साल गिन रहा हूं। पिछले एक साल में अभिमन्यु ने लगभग 864 रन बनाए हैं। उन्होंने दलीप ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी, और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अच्छा प्रदर्शन किया, फिर भी उन्हें नजरअंदाज किया गया। करुण नायर तो इन टूर्नामेंट्स में टीम का हिस्सा भी नहीं थे।” उन्होंने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अभिमन्यु खराब खेलते हैं, तो बाहर कर दिया जाता है, लेकिन जब वे रन बना रहे थे, तब नजरअंदाजी क्यों?
चयन प्रक्रिया पर भड़के पिता, उठाए गंभीर सवाल
अभिमन्यु ईश्वरन के पिता रंगनाथन ईश्वरन ने कहा कि उनका बेटा काफी दुखी है और डिप्रेशन में चला गया है, जो स्वाभाविक भी है। उन्होंने माना कि करुण नायर ने भी 800 से ज्यादा रन बनाए हैं, लेकिन चयन को लेकर तुलना अब भी उचित नहीं लगती। रंगनाथन का कहना है कि वे लगातार बेटे से बातचीत करते रहे ताकि उसका आत्मविश्वास बना रहे, लेकिन चयन की प्रक्रिया से वह टूट चुका है। उन्होंने कहा कि “कुछ खिलाड़ी सिर्फ आईपीएल में अच्छा खेलकर टेस्ट टीम में आ जाते हैं, जबकि रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और ईरानी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंटों का प्रदर्शन असली आधार होना चाहिए।”




