नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने बीसीसीआई की नई यात्रा नीति का समर्थन किया है, जिसमें खिलाड़ियों के लंबे विदेशी दौरों के दौरान उनके परिवारों की उपस्थिति को सीमित किया गया है। गंभीर का कहना है कि “विदेश जाकर क्रिकेट खेलना छुट्टियां मनाने जैसा नहीं है” और ऐसे में खिलाड़ियों का परिवार से दूर रहना एक एक बड़े उद्देश्य के लिए है।
बीसीसीआई ने यह नियम ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (2024-25) में भारत की 1-3 से मिली हार के बाद लागू किए। जनवरी में तय की गई संशोधित नीति के तहत 45 दिन या उससे अधिक लंबे दौरों में खिलाड़ियों के परिवार केवल 14 दिनों तक साथ रह सकते हैं। छोटे दौरे होने पर यह अवधि 7 दिन तक सीमित है। गंभीर का मानना है कि ये नियम टीम की एकाग्रता और प्रदर्शन के लिए जरूरी हैं और खिलाड़ी इसे पेशेवर जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें।
“यह छुट्टी नहीं, देश के लिए खेलने का मौका है”
लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी टेस्ट से पहले चेतेश्वर पुजारा के साथ बातचीत में भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने एक बार फिर बीसीसीआई की उस नीति का समर्थन किया, जिसमें विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के परिवारों की उपस्थिति को सीमित किया गया है। गंभीर ने कहा, “परिवार ज़रूरी हैं, लेकिन एक बात समझनी होगी कि आप यहां किसी मकसद से आए हैं। यह कोई छुट्टी नहीं है। आप एक बड़े उद्देश्य के लिए यहां हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “ड्रेसिंग रूम में या इस दौरे में बहुत कम लोगों को यह सौभाग्य मिलता है कि वे देश को गौरवान्वित करने के लिए मैदान पर उतरें। मैं परिवारों के साथ होने के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन प्राथमिकता टीम और लक्ष्य होना चाहिए।” गंभीर के इस बयान को एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने खिलाड़ियों से पेशेवर दृष्टिकोण अपनाने की उम्मीद जताई है, खासकर जब वे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हों।
“देश को गौरवान्वित करना सबसे बड़ा लक्ष्य है”
गौतम गंभीर का मानना है कि विदेश दौरे के दौरान परिवार का साथ होना अहम हो सकता है, लेकिन जब खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हों, तो उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ उस उद्देश्य पर होना चाहिए। गंभीर ने कहा, “परिवार का होना जरूरी है, लेकिन अगर आपका असली फोकस देश को गौरवान्वित करने पर है और आपकी भूमिका किसी भी दूसरी चीज से कहीं ज्यादा बड़ी है, तो बाकी सब पीछे रह जाता है। मेरे लिए लक्ष्य और प्रतिबद्धता, हर दूसरी चीज से ज्यादा मायने रखती है।”
“मैं कभी नहीं करता आराम, अगला मैच हमेशा दिमाग में रहता है”
चेतेश्वर पुजारा के साथ बातचीत के दौरान जब पूछा गया कि वह मैचों के बीच खुद को कैसे रिलैक्स करते हैं, तो कोच गौतम गंभीर ने जवाब देते हुए कहा, “यह एक कठिन सवाल है, क्योंकि मुझे आज तक यह समझ नहीं आया कि मैं कैसे आराम करता हूं, क्योंकि सच कहूं तो, मैं कभी आराम करता ही नहीं।” गंभीर ने आगे कहा, “कभी-कभी यह मज़ेदार भी लगता है और अजीब भी, लेकिन जब हमने पिछला टेस्ट मैच जीता था, तो मेरे दिमाग में सबसे पहली बात यही आई कि अगले टेस्ट के लिए टीम का संयोजन क्या होगा।”
“टेस्ट जीतने के बाद भी दिमाग में अगला मैच था”
गौतम गंभीर ने बताया कि टेस्ट मैच जीतने के बाद भी वह खुद को “स्विच ऑफ” नहीं कर पाते। गंभीर ने कहा, “जब मैं अपने कमरे में वापस गया, तो मेरे मन में यही चल रहा था, ये कैसे हो सकता है? हमने अभी-अभी एक टेस्ट मैच जीता है। लड़कों ने शानदार वापसी की है। लेकिन मैं पहले से ही यह सोचने लगा था कि अगले मैच के लिए टीम का संयोजन क्या होगा और हम अगला मुकाबला कैसे जीत सकते हैं।”
बीसीसीआई की पॉलिसी पर बोले विराट कोहली
आईपीएल 2025 से पहले बीसीसीआई द्वारा खिलाड़ियों के विदेशी दौरों में परिवारों की उपस्थिति को सीमित करने के फैसले पर पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली ने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) इनोवेशन लैब द्वारा आयोजित इंडियन स्पोर्ट्स समिट में कोहली ने कहा कि परिवार का साथ खिलाड़ियों की मानसिक सेहत के लिए बेहद जरूरी है। कोहली ने कहा, “यह समझाना बहुत मुश्किल होता है कि जब बाहर का माहौल तनावपूर्ण होता है या कठिनाई से भरा होता है, तो ऐसे समय में परिवार के पास लौट आना कितना सुकून देता है।”
कोहली ने कहा कि , “मुझे इस बात का दुख होता है कि जो लोग इन परिस्थितियों का हिस्सा ही नहीं होते, वो तय करने लगते हैं कि खिलाड़ियों को अपने परिवार से दूर रखा जाना चाहिए। जबकि सच यह है कि अगर आप किसी भी खिलाड़ी से पूछें, तो वह यही कहेगा कि वह चाहता है उसका परिवार उसके साथ रहे।” कोहली ने कहा, “मैं नहीं चाहता कि मैं अपने कमरे में अकेले बैठकर उदास रहूं। मैं एक सामान्य इंसान की तरह जीना चाहता हूं। जब मैं खेल की जिम्मेदारी निभा लूं, तो फिर अपने जीवन में लौट सकूं।”




