नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में सत्ता की लड़ाई सिर्फ कुर्सी तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि मुख्यमंत्री आवास भी उतना ही अहम होता है। आज जब Nitish Kumar करीब दो दशक बाद 1, अणे मार्ग स्थित CM हाउस खाली करने जा रहे हैं, तो 2015 का एक पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया है। यह वही मामला है, जब Nitish Kumar और Jitan Ram Manjhi के बीच मुख्यमंत्री आवास को लेकर टकराव इतना बढ़ गया था कि वहां पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी थी।
2014 की हार के बाद बदली सियासत
कहानी की शुरुआत 2014 के लोकसभा चुनाव से होती है, जब जेडीयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद Nitish Kumar ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने करीबी सहयोगी Jitan Ram Manjhi को मुख्यमंत्री बनाया, जिन्होंने 20 मई 2014 को पद संभाला। इसके बाद नीतीश कुमार ने CM हाउस छोड़कर 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास में शिफ्ट कर लिया।
2015 में फिर हुआ सत्ता परिवर्तन
फरवरी 2015 में बिहार की राजनीति ने फिर करवट ली। Nitish Kumar ने दोबारा सत्ता में वापसी की तैयारी शुरू की और Jitan Ram Manjhi को पार्टी से बाहर कर दिया गया। राजनीतिक हलचल के बीच मांझी ने इस्तीफा दे दिया और 22 फरवरी 2015 को नीतीश कुमार ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।
CM हाउस खाली करने को लेकर अड़े मांझी
सत्ता बदलने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। Jitan Ram Manjhi 1, अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास खाली करने को तैयार नहीं थे। उन्होंने कहा कि पहले नीतीश कुमार अपना पुराना आवास खाली करें, तब ही वह CM हाउस छोड़ेंगे। मामला इतना बढ़ गया कि सरकार को CM हाउस पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां 8 सब-इंस्पेक्टर और 16 कांस्टेबल लगाए गए थे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए।
‘फलों की जंग’ बनी सुर्खियां
विवाद सिर्फ बंगले तक सीमित नहीं रहा। आम और लीची के पेड़ों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच तनातनी हुई। Jitan Ram Manjhi ने आरोप लगाया कि उन्हें बंगले के पेड़ों से फल लेने तक नहीं दिया जा रहा। इस विवाद को मीडिया में ‘फलों की जंग’ नाम दिया गया। काफी खींचतान के बाद आखिरकार जून 2015 में Jitan Ram Manjhi ने CM हाउस खाली कर दिया और दूसरे सरकारी आवास में चले गए।
आज फिर चर्चा में क्यों है ये किस्सा?
आज जब Nitish Kumar खुद CM हाउस छोड़ने जा रहे हैं, तो यह पुराना विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। यह किस्सा बताता है कि बिहार की राजनीति में सत्ता के साथ-साथ सरकारी आवास भी कितनी बड़ी अहमियत रखता है।





