नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। हज यात्रा पर जाने वाले जायरीनों के लिए इस बार सफर महंगा हो गया है। हवाई किराए में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे यात्रियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। यह फैसला ATF एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते लिया गया है, जिसका असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ा है।
क्यों बढ़ाया गया किराया?
सरकार के अनुसार, मध्य-पूर्व में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के कारण ATF की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। आमतौर पर ATF किसी भी एयरलाइन की कुल लागत का 30-40% हिस्सा होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने से हवाई किराया बढ़ाना जरूरी हो गया। हज कमेटी के सर्कुलर के मुताबिक, हर तीर्थयात्री को लगभग 100 डॉलर यानी करीब ₹10,000 अतिरिक्त देने होंगे। सभी यात्रियों को यह राशि 15 मई तक जमा करनी होगी।
यात्रियों और विपक्ष में नाराजगी
इस फैसले के बाद हज यात्रियों में नाराजगी है। विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना की है। Asaduddin Owaisi ने इसे “शोषण” करार देते हुए कहा कि हज पर जाने वाले लोग अमीर नहीं होते, बल्कि वे सालों तक पैसे बचाकर यह यात्रा करते हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद Imran Pratapgarhi ने सवाल उठाया कि आखिरी समय पर किराया बढ़ाने की क्या जरूरत थी।
सरकार ने क्या दी सफाई?
विवाद बढ़ने के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री Kiren Rijiju ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि एयरलाइंस ने पहले प्रति यात्री $300–$400 अतिरिक्त किराया मांगा था, लेकिन सरकार ने बातचीत कर इसे घटाकर $100 तक सीमित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह फैसला पारदर्शिता के साथ लिया गया है, ताकि हज यात्रा में कोई बाधा न आए।
क्या है सरकार का तर्क?
मंत्रालय के मुताबिक, सरकार के हस्तक्षेप से यात्रियों को ज्यादा बढ़ोतरी से बचाया गया है। सरकार का कहना है कि यह शोषण नहीं, बल्कि यात्रियों को बड़े आर्थिक बोझ से बचाने की कोशिश है। हज किराए में बढ़ोतरी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार इसे मजबूरी बता रही है, वहीं विपक्ष और यात्री इसे बोझ मान रहे हैं। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या फैसला होता है और क्या सरकार इसमें कोई राहत देती है।





