नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय शादियां पूरी दुनिया में फेमस हैं। भारतीय शादियों कि लिए पूरी दुनिया में Big Fat Indian Wedding या फिर The great Indian Wedding जैसे टर्म्स का इस्तेमाल किया जाता है। हो भी क्यों न, भारत में शादी की इकॉनमी 10 लाख करोड़ रुपये की है। ये श्रीलंका की जीडीपी का डेढ़ गुना है। लेकिन आजकल कपल्स में विदेश में जाकर शादी करने का ट्रेंड चल पड़ा है, इस ट्रेंड के चलते भारत की Wedding Economy पर असर पड़ रहा है। इस वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय और विदेशी जोड़ों से अपील कर रहे हैं वो भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग करें। उनका कहना है कि Wed In India से भारत में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
हर साल भारत में होती हैं लाखों शादियां
एक रिपोर्ट में जारी आंकड़ों के अनुसार वैश्विक शादियों का लगभग 25 प्रतिशत आयोजन सिर्फ भारत में ही होता है। इसका मतलब है कि दुनिया में हो रही हर चार में से एक शादी भारत में होती है। इंडियन ब्रांड इक्विटी फोरम (IBEF) के अनुसार, भारतीय विवाह उद्योग देश का चौथा सबसे बड़ा उद्योग है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का अनुमान है कि हर सीजन में देशभर में करीब 42 लाख से ज्यादा शादियां आयोजित होती हैं।
पीएम मोदी ने का है ये मिशन
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘Wed In India’ मिशन लॉन्च किया है। जिसका उद्देश्य देश का पैसा देश में ही रहे है। उन्होंने लोगों से अपनी शादियां विदेशों में जाने के बजाय भारत में करने का आग्रह किया है। उन्होंने उन सभी लोगों से विदेश की बजाय अपने देश में डेस्टिनेशन वेडिंग करने का आग्रह किया है।
देश में बढ़ रहा डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड अनौपचारिक अनुमान बताते हैं कि विदेश में हर साल भारत वालों की लगभग 5 हजार डेस्टिनेशन शादियां होती हैं। जिनमें करीब 75,000 करोड़ से लेकर 1 लाख करोड़ रुपए तक का खर्चा होता है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा डेस्टिनेशन वेडिंग
भारत के राजस्थान, गोवा, केरल और उत्तराखंड राज्यों सबसे ज्यादा डेस्टिनेशन वेडिंग होती हैं। यहां होटल और रिसॉर्ट में शानदार वेडिंग पैकेज उपलब्ध हैं। जिनके माध्यम से नए और शादीशुदा जोड़े अपनी शादी को यादगार बना सकते हैं। ‘वेड इन इंडिया’ जैसी पहल से डोमेस्टिक वेडिंग को बढ़ावा मिलने से हजारों बेरोजगारों को नई नौकरियां मिल सकती हैं।




