नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ रेप व हत्या के बाद उठे बवाल के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में अपराजिता बिल पेश की थी। जिसे सभी दलों ने समर्थन दिया था। अब उस बिल को लेकर नई जानकारी सामने आई है। दरअसल उस बिल को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पास भेजा गया था। जिसे राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास विचार के लिए भेज दिया है। दरअसल राज्यपाल बोस को मुख्य सचिव मनोज पंत ने दिन में विधेयक की तकनीकी रिपोर्ट सौंपी थी। जिसे पढ़ने के बाद राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया।
राज्यपाल ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस विधेयक में मौजूद गंभीर दोष और खामियां बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अपने एक्स पर पोस्ट कर विधानसभा सचिवालय के द्वारा नियमों के तहत डिबेट का टेक्स्ट और उसका अनुवाद उपलब्ध नहीं कराने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तीखी बहस, आपसी आरोप-प्रत्यारोप, राजनीतिक धमकियों और अल्टीमेटम के बाद ममता बनर्जी ने राज्यपाल के द्वारा विधेयक को मंजूरी नहीं दिए जाने पर राजभवन के बाहर धरना देने की धमकी दी थी।
सीएम के धमकाने पर राज्यपाल ने व्यक्त की नाराजगी
राजभवन ने अपने बयान में कहा है कि राज्यपाल ने सीएम के धमकाने वाले रुख पर नाराजगी व्यक्त की है और सरकार को कानूनी और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन नहीं करने के लिए फटकार लगाई है। गौरतलब है कि गुरुवार को राज्यपाल ने राज्य सरकार पर रेपिस्टों के लिए मौत की सजा के प्रस्ताव वाले बिल की एक प्रति के साथ तकनीकी रिपोर्ट भेजने में विफल होने का आरोप लगाया था।
राज्यपाल ने विधेयक में मौजूद खामियों को किया उजागर
राजभवन के अनुसार राज्यपाल ने जल्दबाजी में पारित विधेयक में खामियों को उजागर किया है। इसके लिए सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि जल्दबाजी में काम न करें आराम से पश्चाताप करें। राज्यपाल ने कहा कि लोग ट्रेनी महिला डॉक्टर के लिए न्याय चाहते हैं। इसके लिए राज्य सरकार को प्रभावी ढंग से काम करना चाहिये।




