नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 16 दिसंबर 2024 का दिन भारत और बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक दिन है। आज के दिन ही भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को दो फाड़ कर बांग्लादेश के जन्म की नींव डाली थी। इस उपलक्ष्य में आज का दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने बांग्लादेश को आजाद करने में अहम भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान के 93000 सैनिकों ने सरेंडर कर भारत के सामने हथियार डाल दिए थे।
पूर्वी पाकिस्तान को तोड़कर बना था बांग्लादेश
साल 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तान का दमन बढ़ता जा रहा था। पाकिस्तानी जनरल याह्या खान ने सैन्य शासन का इस्तेमाल करते हुए वहां के नागिरकों का दमन करना शुरु कर दिया था। पाकिस्तानी सरकार इस कार्यवाई के आगे नतमस्तक थी। नरंसहार इस कदर बढ़ गया कि शेख मुजीबुर रहमान ने इससे लोहा लेने की ठान ली। उन्होंने मुक्ति वाहिनी सेना बनाई और भारत की मदद से निकल पड़े अपने मिशन पर। भारत की प्रधानमंत्री उस समय इंदिरा गांधी थी जिन्होंने बिना देर किए भारत की सेना को पाकिस्तान के होश ठिकाने लगाने के लिए आदेश दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर बांग्लादेश आज आजाद है तो भारत की उसमें अहम भूमिका है।
93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने किया था सरेंडर
प्रधानमंत्री का आदेश पाते ही भारतीय सेना ने 4 दिसंबर 1971 को ऑपरेशन ट्राइडेंट को अंजाम दे दिया। तकरीबन 12 दिन महासंग्राम चलने के बाद 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना को परास्त करके बांग्लादेश का जन्म हुआ था। पाकिस्तान की सेना ने जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी के नेतृ्त्व में भारतीय सेना और शेख मुजीबुर रहमान की मुक्ति वाहिनी से सामने सरेंडर कर दिया था। 93000 सैनिकों का सरेंडर दूसरे विश्व यु्द्ध के बाद सबसे बड़ा सरेंडर था। इसके बाद से ही भारत में विजय दिवस मनाया जाता है।




