नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीज़ा के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस की जरूरत को खत्म कर दिया है। बांग्लादेश की सिक्योरिटी सर्विसेज डिविजन (SSD) की तरफ से जारी किए गए लेटर में इस बदलाव का ऐलान किया गया है। अब तक पाकिस्तान के नागरिकों को बांग्लादेश के वीज़ा के लिए SSD का क्लियरेंस लेना जरूरी होता था, ये प्रोटोकॉल 2019 में लागू किया गया था। हालांकि, अब बांग्लादेश की सरकार ने इसे खत्म कर दिया है।
भारत की टेंशन बढ़ाने वाला फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का यह फैसला भारत की सुरक्षा के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। भारत पहले ही अपनी उत्तर और पश्चिमी सीमाओं पर पाकिस्तानी घुसपैठ से जूझ रहा है। बांग्लादेश के इस फैसले के बाद पूर्वी सीमा पर भी भारत के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
शेख हसीना की पार्टी 1971 के अत्याचारों और 1975 में शेख मुजीबुर रहमान की हत्या में ISI की भूमिका के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराती रही है। रिश्ते पहले से ही काफी समय से खराब थे, फिर 2019 में शेख हसीना ने पाकिस्तान को लेकर कड़ा फैसला लिया। उस निर्णय के अनुसार, बांग्लादेश में प्रवेश के लिए पहले ‘नॉन ऑब्जेक्शन’ मंजूरी अनिवार्य कर दी गई।
बांग्लादेश का पाकिस्तान प्रेम भी तेजी से बढ़ने लगा
हाल ही में बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद शेख हसीना शरण के लिए भारत आई थीं, जिसके बाद बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया। इस सरकार के बनते ही बांग्लादेश से हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें आने लगीं और दूसरी ओर बांग्लादेश का पाकिस्तान प्रेम भी तेजी से बढ़ने लगा है।
बांग्लादेश का यह फैसला भारत के लिए चुनौती
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का यह फैसला भारत के लिए सुरक्षा चुनौती खड़ी कर सकता है। क्योंकि भारत और बांग्लादेश चार हजार से भी अधिक किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, असम और मिजोरम की सीमाएं बांग्लादेश से लगती हैं। बांग्लादेश और सीमावर्ती भारतीय राज्यों के बीच महत्वपूर्ण सीमा पार आवाजाही और व्यापार होता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को लेकर बांग्लादेश सरकार के इस फैसले के बाद चरमपंथियों और आतंकवादियों को बिना किसी परेशानी के बांग्लादेश तक पहुंच आसान हो जाएगी।
इससे पहले भी, जब 2001 से 2006 तक बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी सत्ता में थे, तब ISI वहां पूरी तरह से सक्रिय थी। लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठन भी बांग्लादेश से संचालित होने लगे थे और इसी दौरान भारत में कई आतंकवादी हमले हुए, जिनकी योजना बांग्लादेश में बनाई गई थी।




