नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी भी अब पूरी ताकत से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार टिकट वितरण को सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं। साफ संदेश है जिसकी जमीन पर पकड़ मजबूत, उसी को मिलेगा टिकट।
जातीय समीकरण बनेगा टिकट का आधार
सपा इस बार उम्मीदवार तय करते समय जातीय संतुलन को सबसे ज्यादा महत्व देगी। जिस सीट पर जिस जाति का प्रभाव ज्यादा होगा, उसी वर्ग से उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी का मानना है कि सही जातीय समीकरण के साथ चुनाव लड़कर ही बीजेपी को रोका जा सकता है।
जनाधार और सर्वे रिपोर्ट पर फैसला
सूत्रों के मुताबिक, सपा हर सीट पर सर्वे कराएगी और यह देखा जाएगा कि किस दावेदार की जमीनी पकड़ सबसे मजबूत है। सर्वे में इन बातों को परखा जाएगा इलाके में सक्रियता, जनता से जुड़ाव, संगठन में पकड़ जातीय समर्थन जो इन सभी पैमानों पर खरा उतरेगा, वही उम्मीदवार बनेगा। इस बार सपा साफ है कि सिर्फ बड़े नाम या सिफारिश के दम पर टिकट नहीं मिलेगा। जिसकी जमीन पर पकड़ नहीं, उसका पत्ता कटना तय है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि कमजोर उम्मीदवारों की वजह से सीट गंवानी पड़े। अखिलेश यादव लगातार पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। वे हर जिले से फीडबैक ले रहे हैं कि किस इलाके में कौन नेता मजबूत है और किसे जनता पसंद कर रही है। इस फीडबैक के आधार पर ही टिकटों का फाइनल फैसला होगा।
यादव-मुस्लिम के साथ पिछड़ों और ब्राह्मणों पर भी नजर
परंपरागत रूप से सपा को यादव और मुस्लिम वोट मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार पार्टी की नजर पिछड़ी जातियों और ब्राह्मण वोटबैंक पर भी है। लोकसभा चुनाव में कुर्मी समाज के समर्थन से उत्साहित सपा अब इस वर्ग को भी साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। अखिलेश यादव का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला ही सपा की चुनावी धुरी रहेगा। इसी आधार पर उम्मीदवार चयन, गठबंधन और सीट बंटवारे का फॉर्मूला भी तय किया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2024 में अच्छे प्रदर्शन के बाद सपा का मनोबल ऊंचा है। पार्टी चाहती है कि वही लय 2027 विधानसभा चुनाव में भी बनी रहे। इसी वजह से टिकट वितरण में कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा।




