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Saturday, March 7, 2026
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ये नजूल विधेयक क्या है जिस पर यूपी में बवाल मचा हुआ है? योगी सरकार की सहयोगी अनुप्रिया पटेल ने ही उठा दिए सवाल

UP News: अब नजूल विधेयक को प्रवर समिति को भेजने के इस फैसले के बाद विधानसभा दो महीने बाद ही प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद इसपर निर्णय लेगी।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भाजपा के कई विधायकों की नाराजगी के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने नजूल विधेयक को विधान परिषद में सलेक्ट कमिटी को भेजने की मांग कर डाली। जिसके बाद विधान परिषद के सभी सदस्यों ने नजूल विधेयक को सलेक्ट कमिटी को भेजने का फैसला लिया। अब नजूल विधेयक को प्रवर समिति को भेजने के इस फैसले के बाद विधानसभा दो महीने बाद ही  प्रवर समिति की रिपोर्ट के बाद इसपर निर्णय लेगी। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी सहमति दे दी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधानसभा में नजूल विधेयक पास हो जाने के बाद विधान परिषद में इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी सहमती दे दी है। 

केंद्रीय मंत्री और यूपी में बीजेपी की सहयोगी अनुप्रिया पटेल

वहीं केंद्रीय मंत्री और यूपी में बीजेपी की सहयोगी अनुप्रिया पटेल ने इस विधेयक के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए, अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर दो पोस्ट किए हैं। उन्होंने अपनी इन पोस्ट में लिखा “उत्तर प्रदेश सरकार को इस विधेयक को तत्काल वापस लेना चाहिए और इस मामले में जिन अधिकारियों ने गुमराह किया है उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।” “नजूल भूमि संबंधी विधेयक को विमर्श के लिए विधान परिषद की प्रवर समिति को आज भेज दिया गया है। व्यापक विमर्श के बिना लाये गये नजूल भूमि संबंधी विधेयक के बारे में मेरा स्पष्ट मानना है कि यह विधेयक न सिर्फ़ ग़ैरज़रूरी है बल्कि आम जन मानस की भावनाओं के विपरीत भी है।”

नजूल की भूमि का अर्थ

वहीं कांग्रेस ने नजूल विधेयक को लेकर कहा कि बीजेपी के भीतर भी खुद इस विधेयक को लेकर नाराजगी हैं। कांग्रेस ने इसको लेकर आंदोलन करने की चेतावनी दे डाली। बताना चाहेंगे कि नजूल की भूमि का अर्थ उस जमीन से है, जिसका कई सालों से कोई वारिस ही नहीं है। जिसके कारण ऐसी जमीनों का अधिकार राज्य सरकार को चला जाता है।

बताना चाहेंगे कि अंग्रेजो के समय में जो भी उनके खिलाफ आवाज उठाता था तो अंग्रेज उनकी रियासतों पर अपना कब्जा कर लेती थी। आजादी के बाद जब जमीन के वारिसो ने अपनी जमीन पर प्रमाणों के साथ दावा किया तो सरकार ने उनकी जमीन उन्हें वापस कर दी थी। लेकिन जिन जमीनों पर किसी ने दावा नहीं किया वो जमीने नजूल की जमीन बन गई। जिसका अधिकार राज्य सरकार के पास है। इसलिए यूपी सरकार यह विधेयक लाकर ऐसी जमीनों का प्रयोग विकास कार्यों के लिए करना चाहती है।”

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