नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने बाज़ी मारी। उन्होंने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर जीत हासिल की। सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले। बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए।
जयराम रमेश की प्रतिक्रिया
परिणाम जारी होने के अगले दिन यानी 10 सितंबर को जयराम रमेश ने X पर लिखा था कि विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में पूरी तरह एकजुट खड़ा रहा। विपक्ष का प्रदर्शन निस्संदेह रूप से सम्मानजनक रहा। संयुक्त उम्मीदवार, न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त बी. सुदर्शन रेड्डी ने 40% वोट हासिल किए। वर्ष 2022 में विपक्ष को केवल 26% वोट मिले थे। भाजपा की अंकगणितीय जीत वास्तव में नैतिक और राजनीतिक दोनों तरह से हार है। वैचारिक लड़ाई अनवरत जारी है, बता दें कि इस चुनाव में सीपी राधाकृष्णन को 452 मत प्राप्त हुए हैं जबकि बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले।
केशव प्रसाद मौर्य का पलटवार
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस बयान पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कांग्रेस हर हार को ‘नैतिक विजय’ मानने में माहिर हो चुकी है। 2014 से अब तक कांग्रेस इतनी ‘नैतिक जीत’ दर्ज कर चुकी है कि राजनीतिक पंडित भी गिनती करने से घबराने लगे हैं। कांग्रेस को अपनी इन नैतिक जीतों का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहिए। उपराष्ट्रपति चुनाव नतीजों के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ओर से बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। जहां कांग्रेस विपक्ष की एकजुटता को बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस की “नैतिक विजय” वाली राजनीति पर तंज कस रही है। तो वही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर डिप्टी CM ने कहा कि उनकी सरकार अब जाने वाली है। 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की सरकार जा रही है और वहां कमल खिलाने जा रहा है। इससे ममता बनर्जी बौखलाई हुई हैं और अनाप-शनाप बोल रही हैं। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी धांधली नहीं करती तो वहां पर कमल खिल चुका था।




