नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दो नए जजों ने पद की शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली को शपथ दिलाई। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की पूरी संख्या पूरी हो गई है।
जस्टिस पंचोली भविष्य में बनेंगे CJI?
जस्टिस विपुल पंचोली की नियुक्ति खास है क्योंकि भविष्य में वे देश के मुख्य न्यायाधीश बन सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, जस्टिस जोयमाल्या बागची के रिटायर होने के बाद 3 अक्टूबर 2031 को वे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) का पदभार संभालेंगे। उनका कार्यकाल 27 मई 2033 तक रहेगा।
नियुक्ति पर उठा विवाद
जस्टिस पंचोली की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सदस्य और एकमात्र महिला जज, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने असहमति जताई थी। उन्होंने कहा था कि गुजरात हाईकोर्ट से पहले ही एक जज (जस्टिस जे.बी. पारडीवाला) सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हैं और भविष्य के CJI भी होंगे। जस्टिस पंचोली, हाईकोर्ट जजों की वरिष्ठता सूची में काफी पीछे हैं। कई योग्य और वरिष्ठ महिला जजों को नजरअंदाज कर उनकी सिफारिश की गई। 2023 में गुजरात से पटना हाईकोर्ट ट्रांसफर के दौरान भी विवाद हुआ था।
जस्टिस आलोक अराधे का सफर
जस्टिस आलोक अराधे का जन्म 13 अप्रैल 1964 को हुआ, 1988 में वकालत की शुरुआत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रैक्टिस 2009 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज बने, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक हाईकोर्ट में जज और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। 2023 में तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। जनवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। जस्टिस विपुल पंचोली का सफर जन्म: 28 मई 1968, अहमदाबाद। 1991 में वकालत की शुरुआत। गुजरात हाईकोर्ट में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक रहे। 2014 में गुजरात हाईकोर्ट के जज बने। 2023 में पटना हाईकोर्ट में ट्रांसफर हुए। जुलाई 2025 में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। अब सुप्रीम कोर्ट में सभी 34 पद भर चुके हैं। जस्टिस पंचोली की नियुक्ति को लेकर विवाद जरूर रहा, लेकिन उनकी भविष्य की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि वे आने वाले समय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने वाले हैं।





