नई दिल्ली/रफ्तार डेेेस्क। प्रयागराज में चल रहें महाकुंभ में देश दुनिया से लाखों करोड़ों की तादाद में लोग पहुंच रहें। क्योंकि 144वर्ष बाद आए इस महाकुंभ में अपना उद्धार करने कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता। इसलिए तो इस बार के महाकुंभ में करोड़ो की जनसंख्या में श्रद्धालु इसका लाभ लेने पहुंच रहें है। वहीं इसमें कई साधु संतों के साथ श्रद्धालु भी महीनों तक करते हैं कल्पवास। जिसमें बनें शिविर में रहकर रोज त्रिवेणी संगम स्नान कर पूजा पाठ कर साधु संतो हो या आमजन सभी भक्ति दर्शन में डूबे रहते है।
पवित्र आयोजन का अभिन्न अंग
साधु संत श्रद्धालु अनगिनत भक्तों की सेवा करते है। ये एक आध्यात्मिक यात्रा होती है। जिसमें दान और भक्ति सेवा को मुक्ति का मार्ग माना जाता है। जिसमें आप व्यक्तिगत सहायता के माध्यम हो या इस पवित्र आयोजन का अभिन्न अंग बन ईश्वर के प्रेम और भक्ति को महसूस करते हैं। ये महाकुंभ का दान आने वाले वर्षों तक फलिभूत करता रहेगा।
कल्पवासी सेजिया दान करेगें
भारतीय संस्कृति में दान को हमेशा से एक आध्यात्मिक उत्थान के लिए शक्तिशाली मार्ग के रूप में मान्यता दी है। जब आप निस्वार्थ भाव से दान करते हैं, तो आप न केवल जरूरतमंदों की मदद करते हैं, बल्कि भगवान को भी प्रसन्न करते हैं।
हर बार के कुंभ की तरह ही इस बार महाकुंभ में भी कल्पवासी सेजिया दान करेगें। जिसमें वे तीर्थपुरोहितों के अनुसार कल्पवास और सेजिया दान का संकल्प ले अपने आनेवाले सालों को फलिभूत करेगें । तीर्थपुरोहितों के अनुसार इस बार हजारों से लाखों कल्पवासी माघी विदाई से पूर्व अपने दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं का विधिविधान से दान संकल्प कर तीर्थपुरोहितों से आर्शिवाद प्राप्त करते है। इस बार कई कल्पवासी दान के लिए सामग्री की सूची तीर्थपुरोहित से बातें कर बना ली है। जिसमें सोने-चांदी के जो आभूषण को देने एडवांस भी दे दिया है। इस बार भी 84 दान के श्रेष्ठ दानों में एक सेजिया दान कर कल्पवासी अपना कल्याण कर परलोक में मोक्ष की कामना करेगें।
गाय दान
बैतरणी गाय दान में पिंडदान करते समय सबसे महत्वपूर्ण दानों में से एक माना जाता है। जिसमें ब्राह्मण पुजारी को बैतरणी नदी पार करने के लिए गाय दान देता है।ऐसा माना जाता है कि जिसने भी पाप किए हैं, उन्हें नरक में जाने के बाद नदी पार करनी पड़ती है।
अन्न दान
पिंडदान करते समय दूसरा महत्वपूर्ण दान है अन्न दान या मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति और संतुष्टि के लिए अंतिम संस्कार करते समय किया जाने वाला अनाज का दान।
सेजिया दान
तीसरा महत्वपूर्ण दान सेजिया दान है जिसमें दिवंगत आत्माओं द्वारा उपयोग की गई सभी सामग्री जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान कर दी जाती है। जिसमें दैनिक जीवन में काम आनेवाली कई प्रकार की वस्तुएं और चीजें होती है।
वहां रहकर हर कोई कल्पवासी अपनी श्रद्धा अनुसार किसी न किसी चीज का दान का संकंल्प लेते है। फिर वो अन्न दान हो या शय्या दान या मौद्रिक दान ऐसे ही चौरासी प्रकार के दान की प्रक्रिया होती हैं। जिसमें अपनी-अपनी श्रद्धानुसार सभी दान का संकल्प लेते हैं। वैसे ही इस बार भी महाकुंभ में रहनेवाले कल्पवासी इसकी तैयारी शुरु कर दिए हैं। इस बार 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर कल्पवास के समाप्त होने के एक सप्ताह पहलें ही दान की प्रक्रिया शुरु हो जाऐगी।




