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Sunday, March 8, 2026
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Magh Purnima 2026: इस दिन मनाई जाएगी माघ पूर्णिमा, जानिए धार्मिक महत्व और चंद्रोदय समय की पूरी जानकारी

माघ पूर्णिमा 2026 के दिन ही रवि पुष्य योग भी इस बार बन रहा है। इस दौरान गंगा नदी में स्नान करने के बाद दान करने से लाभ मिलता है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा का महत्व बेहद खास माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और व्रत करने से अत्यधिक पुण्यफल की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी, रविवार को पड़ रही है। इस बार की माघ पूर्णिमा और भी विशेष रहेगी क्योंकि इसी दिन रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है, जो शुभ कार्यों और व्रत-पुण्य के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।

माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और समय

माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी 2026 को सुबह 5:53 बजे से प्रारंभ होकर मध्य रात्रि के पश्चात 3:39 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन प्रदोष काल में विशेष पूजन और व्रत किए जाने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन रविवार होने और पुष्य नक्षत्र के कारण रवि पुष्य योग का संयोग भी बन रहा है।

स्नान और दान का शुभ मुहूर्त

इस दिन स्नान और दान करने का सबसे उत्तम समय सुबह 5:30 बजे से 7:09 बजे तक है। माघ पूर्णिमा पर तिल, वस्त्र, कंबल, फल, घी और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही पितरों का श्राद्ध करना भी पुण्यदायी होता है। इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

माघ पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय का समय

माघ पूर्णिमा पर चंद्रमा का उदय शाम 5:46 बजे होगा। चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को अर्घ्य देना विशेष पुण्यदायी होता है।

माघ पूर्णिमा पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को अर्घ्य दें।

घर के पूजा स्थल पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें और चौकी के चारों तरफ कलावा बांधें।

भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं, वस्त्र आदि अर्पित करें और उनका तिलक करें।

केले, पंचामृत, कसाल आदि चढ़ाएं और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना व आरती करें।

माघ पूर्णिमा के दिन यह विधि अपनाने से जीवन में मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन का महत्व और पुण्य किसी भी अन्य पूर्णिमा से विशेष माना जाता है, इसलिए भक्तजन इसे विधिपूर्वक मनाते हैं।

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