नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सनातन धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। ऐसा कोई महीना नहीं होता, जो बिना किसी धार्मिक पर्व के बीत जाए। जनवरी के बाद फरवरी 2026 भी व्रत-त्योहारों से भरपूर रहेगा। हिंदी पंचांग के अनुसार यह महीना मुख्य रूप से फाल्गुन मास में आता है, जिसे आध्यात्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
फरवरी में जहां महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व का आयोजन होगा, वहीं माघ पूर्णिमा, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी और नृसिंह द्वादशी जैसे महत्वपूर्ण व्रत भी पड़ेंगे। खास बात यह है कि इसी महीने साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा और होलाष्टक की शुरुआत होगी।
फरवरी 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची
फरवरी 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस पूरे महीने व्रत-त्योहारों की भरमार रहेगी, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और पर्व मनाने के कई शुभ अवसर मिलेंगे। महीने की शुरुआत 1 फरवरी को गुरु रविदास जयंती, ललिता जयंती और माघ पूर्णिमा स्नान से होगी, जिसे स्नान-दान के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। 2 फरवरी से फाल्गुन माह का आरंभ होगा, जो आगे आने वाले होली पर्व की तैयारियों का संकेत देता है। 5 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी का व्रत रखा जाएगा, जबकि 7 फरवरी को यशोदा जयंती मनाई जाएगी। 8 फरवरी को भानु सप्तमी और शबरी जयंती का संयोग रहेगा, वहीं 9 फरवरी को जानकी जयंती के साथ मासिक कालाष्टमी और मासिक जन्माष्टमी भी पड़ेंगी।
महीने के मध्य में 13 फरवरी को विजया एकादशी और कुंभ संक्रांति का पर्व रहेगा, जबकि 14 फरवरी को शनि त्रयोदशी और शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होगा। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि एक साथ पड़ने से यह दिन शिवभक्तों के लिए बेहद खास रहेगा। इसके बाद 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण के साथ फाल्गुन अमावस्या और दर्श अमावस्या का संयोग बनेगा। 18 फरवरी को चंद्र दर्शन और फुलैरा दूज मनाई जाएगी, वहीं 19 फरवरी को रामकृष्ण जयंती श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। महीने के अंतिम चरण में 24 फरवरी से होलाष्टक की शुरुआत होगी, जो होली पर्व की आहट मानी जाती है। इसके बाद 27 फरवरी को आमलकी एकादशी और 28 फरवरी को नृसिंह द्वादशी के साथ फरवरी 2026 का धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण महीना समाप्त होगा।
माघ पूर्णिमा स्नान का विशेष महत्व
1 फरवरी को माघ पूर्णिमा के अवसर पर गंगा, संगम और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं। माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि और सूर्य ग्रहण का संयोग
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को पड़ेगी। इस दिन व्रत, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। वहीं 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगेगा, जिसके कारण धार्मिक कार्यों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
होलाष्टक में शुभ कार्यों पर रोक
24 फरवरी से होलाष्टक शुरू होंगे, जो होली तक रहेंगे। शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। यह समय भक्त प्रह्लाद की परीक्षा और ग्रहों की उग्र स्थिति से जुड़ा माना जाता है।





