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मप्र की सुशासन और विकास रिपोर्ट में बीमारू से विकसित प्रदेश की कहानी

भोपाल/नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की सुशासन और विकास रिपोर्ट 2022 को जारी करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डेढ़ दशक में राज्य में आए बदलाव का ब्यौरा देते हुए कहा कि राज्य बीमारू से विकसित प्रदेशों की पंक्ति में खड़ा हुआ। राज्य के जनसंपर्क विभाग द्वारा विज्ञप्ति में बताया गया है कि नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में सोमवार की रात को आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि आम जनता की सक्रिय सहभागिता से ही मध्यप्रदेश सुशासन के क्षेत्र में देश के सामने उदाहरण बनकर खड़ा हो सका है। आज से 15 वर्ष पहले मध्यप्रदेश जिन क्षेत्रों में बहुत पीछे था और बीमारू राज्य कहलाता था, उन क्षेत्रों में लगातार प्रगति के प्रयास किए गए, जिसका परिणाम यह है कि मध्यप्रदेश पहले विकासशील राज्य बना और अब विकसित प्रदेशों की पंक्ति में खड़ा है। मध्यप्रदेश में जन-भागीदारी से विकास का मॉडल लागू किया गया है। चौहान ने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा, पिछले दो साल में कोविड महामारी के नियंत्रण में इस मॉडल की उपयोगिता सिद्ध हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विकास के लिए जन-भागीदारी पर जोर देते हैं। वे हमारे प्रेरक हैं। मध्यप्रदेश निरंतर जन-भागीदारी के साथ विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत राष्ट्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मध्यप्रदेश में तीन लाख किलोमीटर लंबाई की सड़कें विभिन्न योजनाओं में निर्मित की गईं। बिजली का उत्पादन 05 हजार मेगावॉट से बढ़ाकर 21 हजार मेगावॉट तक पहुंचाया गया। कई बार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश ने पंजाब और हरियाणा को गेहूं उपार्जन में पीछे छोड़ दिया है। मध्यप्रदेश का सोने जैसे दानों वाला गेहूं अमेरिका सहित अनेक देशों में निर्यात होता है। अब गेहूं के निर्यात के लिए प्रयास बढ़ाए जा रहे हैं। प्रदेश में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल भी बनाई गई है। उन्होंने कहा, मध्यप्रदेश में सिंचाई योजनाओं से लाभान्वित सिंचाई रकबा 43 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने केन-बेतवा योजना की मंजूरी से मध्यप्रदेश के बड़े इलाके को लाभान्वित करने की पहल की है। मध्यप्रदेश में अन्य नदी जोड़ों परियोजनाएं भी क्रियान्वित हो रही हैं। प्रदेश की विकास दर 19.7 प्रतिशत देश में सर्वाधिक है। देश की अर्थ-व्यवस्था में मध्यप्रदेश 4.6 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सकल घरेलू उत्पाद में बीते दशक में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुशासन के श्मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस के जिस काम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमारे जिम्मे सौंपा था, उसे सबसे पहले मध्यप्रदेश ने कर दिखाया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीमारू राज्य से मध्यप्रदेश को एक रोल मॉडल राज्य बना दिया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। यू.एम.ई.पी. के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोल्हेम, संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक शोम्बी शार्प, केन्द्रीय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत के सचिव बी श्रीनिवास ने राज्य में हो रहे कार्यों की चर्चा की। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय ग्रामीण विकास और इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, कृषि मंत्री कमल पटेल। --आईएएनएस एसएनपी/एएनएम

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