नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। टाटा ग्रुप देश का ऐसा औद्योगिक केंद्र है जिसका भारत के विकासशील देशों की सूची में शामिल होने में बड़ा योगदान है। जमशेदजी टाटा ने इस ग्रुप की स्थापना की जिसके बाद इसने रतन टाटा के नेत्तृव में दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की की। आज शायद ही कोई घर बाकी रहा हो जहां टाटा का निर्मित सामान रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल न किया जाता हो। आज टाटा ग्रुप के इसी पहलू पर प्रकाश डालेंगे कि कैसे टाटा ने भारत की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका अदा की है।
जमशेदपुर से मिली टाटा ग्रुप को पहचान
स्टील सिटी जमशेदपुर टाटा की तरक्की का पहला पड़ाव रहा है। रतन टाटा ने इस शहर को अपना औद्योगिक केंद्र उस समय बनाया जब इस शहर में संभावनाए न के बराबर थी। टाटा ग्रुप ने स्टील प्लांट इसी शहर में स्थापित किया था। इसकी स्थापना के बाद से ही इस क्षेत्र का कायाकल्प हो गया, सडकों का चौडीकरण किया गया, सार्वजिनक पार्क, पक्की नालियों की दशा बदल दी गई। जमशेदपुर स्टील प्लांट की स्थपना के बाद यहां साल 1918 में टाटा मेन हॉस्पिटल का निर्माण किया गया जिसे शुरुआत में डिस्पेंसरी के तौर पर खोला गया था। 1918 के बाद से अब तक इस अस्पताल की क्षमता में शानदार बढ़ोतरी हुई है। इसमें अब करीब 1000 बेड की क्षमता है, ICU, CCU है।
मुंबई होते हुए कोलकाता पहुंचा था टाटा का कारवां
आज मुंबई की शान कहा जाने वाले ताज होटल का निर्माण भी 16 दिसंबर 1903 में टाटा ग्रुप ने किया था। यह जमशेदजी टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट था जो उनके जीवित रहते ही पूरा हो गया। इसके अलावा मुंबई में ही टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल का निर्माण भी टाटा ग्रुप ने ही किया था। साल 1941 में निर्मित यह अस्पताल कैंसर का ग्लोबल हॉस्पिटल है। इसके बाद टाटा समूह कि विकास यात्रा कोलकाता पहुंची जहां उन्होंने हावड़ा ब्रिज बनाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने ब्रिज के निर्माण में 23,500 टन स्टील का योगदान दिया जो कि ब्रिज के निर्माण मे लगी स्टील का 90 प्रतिशत है।




