नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। रतन टाटा नहीं रहे। रतन टाटा भारत के उन चुनिंदा पब्लिक फिगर्स में से एक हैं जिनके नाम एक भी कॉन्ट्रोवर्सी नहीं हैं। हमेशा लो प्रोफाइल रहने वाले रतन टाटा लोगों को अपने काम से जवाब देने पर यकीन रखते थे। ऐसा ही जवाब उन्होंने दुनिया की सबसे चर्चित कार निर्माता कंपनियों में से एक Ford को दिया था।
जब टाटा इंडिका हुई फेल
टाटा ने अपना व्हीकल बिजनेस टाटा मोटर्स 1945 में शुरू किया था। शुरुआत में कंपनी कमर्शियल व्हीकल बनाती थी। इस सेग्मेंट में कई साल तक अच्छा परफॉर्म करने के बाद टाटा ने पैसेंजर व्हीकल मार्केट में कदम रखा। साल था 1991। शुरुआत में कंपनी ने SUV गाड़ियां बनाईं। साल 1998 में मिडिल क्लास को टारगेट करते हुए टाटा ने टाटा इंडिका लॉन्च की। ये भारत में बनी पहली हैचबैक कार थी। लेकिन शुरुआत में टाटा इंडिका को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला। बिक्री कम थी, कंपनी लॉस में थी तो रतन टाटा ने तय किया कि वो टाटा मोटर्स को अमेरिकी ऑटो कंपनी फोर्ड को बेच देंगे।
Ford के चेयरमैन ने दिखाया था नीचा
साल 1999 में रतन टाटा की मुलाकात तब Ford के अध्यक्ष रहे बिल फोर्ड से हुई। करीब तीन घंटे तक दोनों की बैठक चली, इस दौरान बिल फोर्ड ने रतन टाटा को नीचा दिखाने की कोशिश की। फोर्ड ने कहा, ‘जब आपको पैसेंजर कार बिजनेस का कुछ पता नहीं है तो आपने इसे शुरू ही क्यों किया।’ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तब फोर्ड के अधिकारी ऐसे जता रहे थे जैसे टाटा मोटर्स खरीदकर वो टाटा पर कोई अहसान कर रहे हों। इसके चलते डील कैंसल कर दी गई और रतन टाटा ने टाटा मोटर्स बेचने का विचार भी त्याग दिया।
9 साल बाद टाटा ने खरीदा फोर्ड का जैगुआर
नौ साल बाद यानी साल 2008 में आई अमेरिका की मंदी। उस मंदी में कई कंपनियां डूबी थीं और कई को भारी नुकसान उठान पड़ा था। लेकिन तब तक टाटा मोटर्स एक अच्छी ऑटोमोबाइल कंपनी की तौर पर स्थापित हो चुकी थी। वहीं, फोर्ड दिवालिये की कगार पर आ चुका था। तब टाटा ने फोर्ड को ऑफर किया कि वो उसके दो बिजने जैगुआर और लैंड रोवर खरीदना चाहते हैं। जून 2008 में डील पक्की हुई और तब बिल फोर्ड ने रतन टाटा का आभार व्यक्त किया था।




