नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। एनसीपी (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले अपने एक हालिया बयान के चलते विवादों के घेरे में आ गई हैं। ये मामला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ता नजर आ रहा है। हालांकि, उन्होंने अब अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि बात सिर्फ मेरे बच्चों की थी, साथ ही संविधान का भी उल्लेख किया है।
क्या कहा था सुप्रिया सुले ने?
सुप्रिया सुले ने एक कार्यक्रम में कहा था कि, उनके बच्चों को आरक्षण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे सशक्त और शिक्षित हैं। बस, यहीं से बवाल शुरू हो गया। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे मराठा और अन्य आरक्षण समर्थक समुदायों के खिलाफ बयान करार देते हुए जमकर निशाना साधा। इसपर विवाद बढ़ता देखं सुप्रिया सुले ने एक बार फिर उसी टीवी चैनल के माध्यम से सफाई दी है।
सफाई में बोलीं – मेरी बात को गलत समझा गया
जब विवाद बढ़ा, तो सुप्रिया सुले ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा, मैं बहुत स्पष्ट हूं कि हमें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का पालन करना चाहिए। मैंने सिर्फ अपने दो बच्चों की बात की थी, ना कि किसी समुदाय की। मेरा जन्म और विवाह दोनों ही उदार परिवारों में हुआ है।उन्होंने यह बयान महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि, विशेष रूप से मैंने ये बात अपने बच्चों के संदर्भ में यह बात कही थी।
”मेरा बयान मेरे दो बच्चों तक सीमित था”
सुप्रिया सुले ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा लाभ लेना, खासकर जब वह खुद सक्षम और सशक्त हैं, उन्हें नैतिक रूप से उचित नहीं लगता। उन्होंने ज़ोर दिया कि, उनका बयान केवल उनके दो बच्चों तक सीमित था। जो शिक्षित और सशक्त हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अपील की कि यदि लोग पूरी बातचीत सुनें, तो वे संदर्भ को बेहतर समझ पाएंगे।उन्होंने सिर्फ व्यक्तिगत अनुभव साझा किया था, और किसी भी जाति या वर्ग के आरक्षण के खिलाफ उनका कोई इरादा नहीं था।
”जातिगत आरक्षण आज भी जरूरी है”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे जाति-आधारित आरक्षण में विश्वास रखती हैं, तो उन्होंने साफ कहा, हां, आज भी यह जरूरी है। देश में अभी भी कई सामाजिक विषमताएं हैं। हमें सभी को साथ लेकर चलना होगा, यही बाबासाहेब का सपना था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मराठा, लिंगायत और धनगर समुदाय की आरक्षण मांगों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन एससी-एसटी आरक्षण पहले ही स्थापित और स्वीकृत है।
VBA के आरोपों पर हाथ जोड़कर अपील की
वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने सुप्रिया सुले के बयान को मराठा और अन्य समुदायों के खिलाफ बताया। इस पर सुले ने शालीनता से जवाब देते हुए कहा, मैं हाथ जोड़कर अपील करती हूं कि मेरी पूरी बातचीत का वीडियो देखें। शायद कुछ लोगों को मेरा मतलब समझ नहीं आया। लेकिन मैं हर वर्ग का सम्मान करती हूं।
”पार्टी नेता को मिल रही जान से मारने की धमकी”
इस पूरे विवाद के बीच एक और चिंताजनक मामला सामने आया है। एनसीपी (SP) के ओबीसी सेल के महाराष्ट्र अध्यक्ष राज राजापुरकर को बीते तीन दिनों से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। सुप्रिया सुले ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए कहा,महाराष्ट्र में हमेशा वैचारिक सम्मान की परंपरा रही है। लेकिन अब उसे कमजोर किया जा रहा है, जो दुखद है।
सरकार से सुरक्षा की मांग
सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार से राजापुरकर को त्वरित पुलिस सुरक्षा देने की मांग की है। साथ ही उन अराजक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील भी की, जो इस तरह की धमकियां दे रहे हैं।




