नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंडिगो एयरलाइंस की लगातार उड़ानें रद्द होने और हजारों यात्रियों को हो रही भारी परेशानी से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के समक्ष एक वकील ने इस गंभीर संकट को लेकर एक याचिका दायर की थी, जिस पर CJI ने यह कहकर टिप्पणी की कि एयरलाइन के परिचालन में हस्तक्षेप करना न्यायपालिका का कार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं की सुनवाई?
वकील ने अपनी याचिका में इंडिगो की खराब स्थिति को उठाते हुए कोर्ट से दखल देने की मांग की थी। हालांकि, चीफ जस्टिस ने इस पर स्पष्ट रुख अपनाया।
CJI सूर्यकांत ने सीधे शब्दों में कहा कि एयरलाइन चलाना कोर्ट का काम नहीं है। उन्होंने माना कि निश्चित रूप से मामला गंभीर लगता है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि “सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि लगता है कि सरकार ने समय पर कार्रवाई की है और उम्मीद है इससे असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। यह फैसला इस ओर इशारा करता है कि कोर्ट का मानना है कि एयरलाइन जैसे वाणिज्यिक उद्यमों को नियंत्रित करना और उन्हें व्यवस्थित करना नागर विमानन मंत्रालय (सरकार) के नियामक अधिकार क्षेत्र का विषय है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार पहले ही इंडिगो को रद्द की गई उड़ानों के लिए तत्काल टिकट रिफंड की प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दे चुकी है और अनुपालन न होने पर नियामक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
इंडिगो एयरलाइंस की बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के बाद यात्रियों को हो रही परेशानी को गंभीरता से देखते हुए केंद्र सरकार ने एयरलाइन को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विमानन मंत्रालय ने 6 दिसंबर को इंडिगो को रद्द टिकटों का रिफंड और यात्रियों के छूटे हुए सामान की डिलीवरी के लिए सख्त समय सीमा तय की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रद्द टिकटों का रिफंड 7 दिसंबर, रविवार, रात 8 बजे तक पूरा किया जाना अनिवार्य था। साथ ही, यात्रियों का सामान अगले 48 घंटों, यानी 8 दिसंबर की शाम तक, लौटाना भी एयरलाइन की जिम्मेदारी है।
मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी कि इन आदेशों का पालन न करने की स्थिति में इंडिगो के खिलाफ तत्काल नियामक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम एयरलाइन द्वारा पिछले कुछ दिनों में हजारों उड़ानों को रद्द किए जाने और यात्रियों को हुई भारी असुविधा को देखते हुए उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रभावित यात्रियों को समय पर रिफंड और उनका सामान सुरक्षित रूप से लौटाया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंत्रालय ने एयरलाइन को आदेश दिया कि रद्द की गई उड़ानों के लिए टिकट रिफंड की प्रक्रिया 7 दिसंबर 2025 की रात 8 बजे तक हर हाल में पूरी कर ली जाए।फ्लाइट कैंसिल होने के कारण यात्रियों से अलग हुए सामान को भी अगले 48 घंटों के भीतर डिलीवर करना सुनिश्चित करने को कहा गया था।मंत्रालय ने यह स्पष्ट चेतावनी भी दी थी कि रिफंड प्रक्रिया में किसी भी देरी या आदेश का पालन न करने पर एयरलाइन के खिलाफ तत्काल नियामक कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई तब हुई जब पिछले चार दिनों में इंडिगो की 2,000 से अधिक फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी थीं, जिसका मुख्य कारण केंद्र सरकार के नए पायलट ड्यूटी नियम (FDTL Phase-2) थे।





