नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और इसी के साथ कांवड़ यात्रा की भी शुरुआत हो गई है। हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे तीर्थस्थलों से लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं। जगह-जगह उनके सेवा शिविर लगाए गए हैं और स्वागत किया जा रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह भगवा रंग का दुपट्टा ओढ़े हुए दिखाई दे रही हैं और कांवड़ियों को प्रसाद बांटती नजर आ रही हैं।
असल में, सपा सांसद कांवड़ यात्रियों के लिए लगाए गए एक सेवा शिविर में पहुंचीं थीं। वहां शिविर के आयोजकों ने उन्हें भगवा पटका पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने वही भगवा दुपट्टा पहने हुए श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। प्रसाद बांटने और शिवभक्तों की सेवा करने के बाद, सांसद इकरा हसन ने कहा कि “यह हमारे देश की साझी संस्कृति का प्रतीक है और हमें इसे आगे बढ़ाना चाहिए।”
वीडियो देखकर लोगों ने दी प्रतिक्रियाएं
इकरा हसन द्वारा कांवड़ियों की सेवा करते हुए वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूज़र ने कमेंट किया, “इंसानियत धर्म से ऊपर होती है और इकरा जी ने यही बात अपने काम से साबित की है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह वीडियो दर्शाता है कि जब सभी मिलकर साथ चलें, तो देश और समाज कितना सुंदर नजर आता है।”
सपा और कांग्रेस ने किया था फैसले का विरोध
यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर कुछ सरकारी निर्देशों पर विवाद गहराता जा रहा है। विशेष रूप से तब से जब योगी सरकार ने मुस्लिम संचालकों को ढाबों पर अपने नाम स्पष्ट रूप से नेम प्लेट पर प्रदर्शित करने का निर्देश जारी किया। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। समाजवादी पार्टी ने इस फैसले का विरोध किया था।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद से पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बयान दिया, जो काफी विवादास्पद बन गया। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश देने वालों की तुलना पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों से की जा सकती है। साथ ही, उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “बीजेपी की राजनीति का आधार हमेशा हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन रहा है।” उनके अनुसार, नेम प्लेट लगाने का आदेश लोगों में डर और नफरत फैलाने का एक तरीका है। हसन ने यह भी जोड़ा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी धार्मिक पहचान बताना चाहता है तो वह अलग बात है, लेकिन जबरदस्ती धर्म पूछना गलत है।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, जो सहारनपुर से हैं, ने भी आपत्ति जताते हुए कहा था “यह देश मोहब्बत का है, नफरत का नहीं। पिछली बार भी इस तरह की कोशिशें हुई थीं, और तब भी जनता ने इन्हें नाकाम कर दिया था। इस बार भी ऐसा ही होगा।” इमरान मसूद पहले भी कांवड़ यात्रा के शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आयोजन की वकालत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक सनसनी नहीं फैलानी चाहिए। मसूद ने यह भी बताया कि वे स्वयं भी कांवड़ शिविरों में सेवा कार्यों में शामिल होते रहे हैं।
कांवड़ यात्रा को लेकर योगी सरकार ने जारी किए कई निर्देश
कांवड़ यात्रा के दौरान योगी सरकार ने कई अहम निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने खुले में मांस बिक्री पर रोक, ढाबों की साफ-सफाई, जल आपूर्ति की व्यवस्था और म्यूजिक सिस्टम के लिए ध्वनि सीमा जैसे नियम लागू किए हैं। इसके साथ ही, कई जिलों में पुलिस ने धारा 163 के तहत प्रदर्शन और भीड़ जुटने पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
महिला कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार ने बरती सख्ती
सावन के महीने में निकाली जा रही कांवड़ यात्रा के दौरान महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर इस बार योगी सरकार ने विशेष इंतज़ाम किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कांवड़ियों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। यात्रा मार्गों पर 10,000 से अधिक महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
पुलिस विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 66,000 से ज्यादा पुलिस बल में से लगभग 15% महिला पुलिसकर्मी हैं। इनमें 8,541 महिला कांस्टेबल और 1,486 महिला उपनिरीक्षक शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट रूप से महिला-केन्द्रित सुरक्षा मॉडल अपनाने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत पूरे प्रदेश में महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष हेल्प डेस्क, क्यूआरटी गश्त, और रात्रि गश्त में महिला पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
हेल्प डेस्क पर तैनात होंगी महिला कांस्टेबल
रिपोर्ट के अनुसार, कांवड़ यात्रा मार्गों पर 150 से अधिक महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। इन सभी केंद्रों पर महिला कांस्टेबल की तैनाती की गई है, जो न केवल सहायता प्रदान करेंगी, बल्कि संवेदनशील मामलों में परामर्श भी उपलब्ध कराएंगी। इसके साथ ही, महिला स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से कई जिलों में ‘शक्ति हेल्प बूथ’ भी स्थापित किए जा रहे हैं। इन बूथों पर महिला श्रद्धालुओं को रुकने की सुविधा, मार्गदर्शन, और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।
मेरठ जोन में महिला पुलिस बल की सबसे बड़ी तैनाती
कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्गों में शामिल मेरठ ज़ोन में इस बार सबसे अधिक महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। मेरठ, मुज़फ्फरनगर, बागपत, हापुड़ और ग़ाज़ियाबाद जैसे जिलों में कुल 3,200 महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात हैं। इन ज़िलों में यात्रा मार्गों पर नियमित गश्त के साथ-साथ, संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी का भी प्रबंध किया गया है। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर कुछ किलोमीटर पर सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं।
ड्रोन, सीसीटीवी से निगरानी, सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर
सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत बनाने के लिए यात्रा मार्गों पर ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी नेटवर्क के जरिए सतत निगरानी की जा रही है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या अशांति को समय रहते रोका जा सके।




