नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को बेल मिलेगी या नहीं इसको लेकर सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। SC आज इस मामलें में फैसला सुनाएगा। इस मामले में केजरीवाल ने दो अलग-अलग याचिका कोर्ट में दायर की है। पहली याचिका फेडरल प्रोब एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में उनकी जमानत से इनकार करने और दूसरी CBI के द्वारा उनकी गिरफ्तारी को लेकर चुनौती देने को लेकर दायर की गई है।
केजरीवाल को 26 जून को गिरफ्तार किया गया था
केजरीवाल को CBI ने 26 जून को गिरफ्तार किया था। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें भ्रष्टाचार के मामले में उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखा गया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल को मामले में जमानत की मांग करने के लिए निचली अदालत में जाने को कहा था। यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसे अब रद्द कर दिया गया है।
लाइसेंस धारकों को मिला था अनुचित लाभ
ED ने कथित उत्पाद शुल्क नीति “घोटाले” से जुड़ा एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामला भी दर्ज किया है। इस मामले में ईडी ने 21 मार्च को अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। सीबीआई और ईडी के अनुसार, उत्पाद शुल्क नीति को संशोधित करते समय अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी थी।
मामला बड़ी पीठ को भेजा गया था
कोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत “गिरफ्तारी की आवश्यकता” से संबंधित तीन प्रमुख प्रश्नों को विस्तृत जांच के लिए मामला एक बड़ी पीठ को भेज दिया, जिसमें आदर्श रूप से पांच न्यायाधीश शामिल रहे। भ्रष्टाचार मामले में अपनी याचिका पर 5 सितंबर को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में CBI की इस दलील का कड़ा विरोध किया कि उन्हें पहले ट्रायल कोर्ट से जमानत मांगनी चाहिए थी।
CBI की ओर से एडिश्नल सॉलीसिटर जनरल SV राजू ने केजरीवाल की याचिकाओं की वैधता को चुनौती दी है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल ने अपनी ईडी द्वारा गिरफ्तारी का विरोध किया था, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ट्रायल कोर्ट से संपर्क करने का निर्देश दिया था।





