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Sunday, March 29, 2026
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फीस नहीं भर पाने के कारण छात्र को IIT में नहीं मिला था प्रवेश, SC ने IIT धनबाद को एडमिशन के लिए दिया निर्देश

UP का एक छात्र का जोशा के तहत IIT ISM धनबाद के सीट का सेलेक्शन हुआ था लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण वह समय से फीस नहीं भर पाया था। मद्रास HC गया मगर वहां कुछ न हासिल होने पर छात्र ने SC का सहारा लिया।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। उत्तर प्रदेश के छात्र अतुल ने IIT की परीक्षा पास तो कर ली थी मगर फीस जमा न कर पाने के कारण छात्र का एडमिशन नहीं हो सका था। मगर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अब छात्र को राहत मिल चुकी है। अतुल का IIT में एडमिशन का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने IIT धनबाद में उनके एडमिशन का आदेश दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई 

पूरे मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा कर रहे थे। कोर्ट ने अपना आदेश जारी करते हुए कहा कि ‘हमारा विचार है कि एक प्रतिभाशाली छात्र को बेसहारा नहीं छोड़ा जाना चाहिए, इसलिए हम निर्देश देते हैं कि उसे आईआईटी धनबाद में एडमिशन दिया जाए’ कोर्ट ने यह भी कहा कि देरी हो जाने के बाद भी अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित छात्र अतुल को उसी के बैच में एडमिशन दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन सब से किसी और छात्र को कोई दिक्कत न आए इसलिए अतुल के लिए एक अलग सीट बनवाई जाए। कोर्ट के मुताबिक अतुल और भी छात्रों की तरह हॉस्टल समेत सभी लाभों का हकदार होगा। 

कोर्ट ने छात्र को दी शुभकामनाएं 

कोर्ट ने अतुल को शुभकामनाएं देते हुए कहा, अच्छा करिए और ऐसा इसलिए है क्योंकि वरिष्ठ वकीलों ने मिलकर उसकी फीस भरने का फैसला लिया है। अतुल की तरफ से केस लड़ने वाले वकील ने बताया कि उसके पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं और जिस दिन अतुल का एडमिशन होना था तब तक वह पैसा लेकर नहीं पहुंच सके। 

पहले मद्रास हाईकोर्ट, इसके बाद छात्र पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

अतुल कुमार ने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया क्योंकि जेईई एडवांस परीक्षा प्रधिकरण की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास के पास थी। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि मामला उनके क्षेत्र में नहीं आता फिर छात्र ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसपर सुप्रीम ने 25 सितंबर को आईआईटी मद्रास को नोटिस जारी कर मामले पर जवाब मांगा था। जवाब में आईआईटी मद्रास ने बताया कि छात्र 3:12 तक अपना परिणाम देख रहे थे और उस दौरान भी छात्र ने भुगतान करने का प्रयास नहीं किया था। कॉलेज ने कहा कि इंटरव्यू के दौरान भी छात्र को बताया गया था कि फीस का भुगतान समय पर करना पड़ेगा वरना एडमिशन रोक दिया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेज को इतना ज्यादा आक्रामक रूख नहीं अपनाना चाहिए था, बल्कि यह सोचना चाहिए था कि इस मामले पर कॉलेज क्या कर सकता है। इसका जवाब कॉलेज की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि कॉलेज को जितने प्रयासों की अनुमति थी वह खत्म हो गई थी। 

जस्टिस परदीवाला का सवाल 

जस्टिस परदीवाला ने कॉलेज से सवाल किया की क्या कॉलेज के पास सीट आवंटन सूचना का पर्ची रिकॉर्ड अपलब्ध है? क्योंकि इस रिकॉर्ड में 17500 रु. के भुगतान का निर्देश लिखा रहता है। जिसपर आईआईटी मद्रास के वकील ने कही कि पर्ची रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। मुख्य जज ने कहा कि अतुल एक प्रभावशाली छात्र है उसकी लॉग शीट देखिए, ऐसा कुछ नहीं लगता है कि वह बटन नहीं दबाएगा। उसे केवल एक चीज ने रोका जो 17500 रुपये निकालने में असमर्थता थी। 

डिप्टी डायरेक्टर SC के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं 

इस पूरे मामले पर IIT और ISM के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार ने मीडिया को बताया कि संस्थान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी का इंतजार है। आदेश की कॉपी मिलते ही एडमिशन की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। डिप्टी डायरेक्टर ने यह भी बताया कि इस मामले में आईआईटी मद्रास को फर्स्ट पार्टी और आईआईटी आईएसएम को सेकेंड पार्टी बनाया गया था। उन्होंने बताया कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं आई है। उनके वकील भी मामले को रिप्रजेंट कर रहे थे। आगे उन्होंने कहा कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी हमें भी मिल जाएगी, हम न्यायालय के आदेश का पालन करेंगे। 

कुछ मिनट की वजह से फीस जमा नहीं कर पाया छात्र

डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार ने बताया कि अतुल उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का छात्र है। उसका जोशा के तहत आईआईटी आईएसएम धनबाद में सीट का एलोकेशन हुआ था लेकिन अंतिम कुछ मिनटों में जोशा के पोर्टल फीस जमा करने के लिए लॉगिन किया था। शायद उसके पास आर्थिक अभाव था जिस कारण वह समय से फीस नहीं भर पाया था। पांच बजे पोर्टल बंद हो जाता है और सीट अतुल की सीट किसी और को मिल जाती है। जिसके कारण अतुल को सीट नहीं मिल पाता और उसका एडमिशन नहीं हो पाता है। 

IIT और ISM ऐसे में बच्चों की मदद करती है- डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार

डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि अगर कुछ ऐसा था और इसकी जानकारी मिल गई होती तो आईआईटी आईएसएम ऐसे में बच्चों की मदद करती है। इसके अलावा कई संस्थाए इस समस्या के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आईएसएम के एलुमनी भी फोन कर पूछ रहे हैं कि अगर ऐसा था तो जानकारी देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। साथ ही अतुल का एडमिशन भी अपने संस्थान में जरूर लेंगे।   

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