नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उन्नाव गैंगरेप मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली कानूनी राहत ने एक बार फिर सियासत और समाज दोनों को झकझोर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट की एक पीठ द्वारा सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किए जाने के फैसले पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सवाल उठाते हुए इसे न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया और कहा कि पीड़िताओं को न्याय के बजाय डर और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी आज शाम करीब सात बजे उन्नाव गैंगरेप पीड़िता से मुलाकात कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण वर्ष 2017 के उन्नाव गैंगरेप केस से जुड़ा है, जिसने उस समय देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे और उसके परिवार को धमकाया गया। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद वर्ष 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी एक सजा को निलंबित कर दिया, जिसके बाद उन्हें जमानत मिलने का रास्ता साफ हुआ। इसी फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
राहुल गांधी का तीखा प्रहार
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी ने पीड़िता के पक्ष में जोरदार आवाज उठाते हुए न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि क्या एक गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा सुलूक किसी भी सभ्य समाज को स्वीकार हो सकता है, सिर्फ इसलिए कि वह अपने हक और इंसाफ के लिए खड़ी हुई है। राहुल गांधी ने सजा पाए आरोपी को जमानत दिए जाने को बेहद निराशाजनक और शर्मनाक बताया और कहा कि जब पीड़िता लगातार भय और दबाव में जी रही हो, तब ऐसे फैसले व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा कि जब बलात्कारियों को राहत और पीड़िताओं को अपमान झेलना पड़े, तो इसे न्याय कैसे कहा जा सकता है। राहुल गांधी ने इसे केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक संकट बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसे फैसले देश को एक असंवेदनशील और “मृत समाज” की ओर धकेलते हैं।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
कोर्ट के फैसले के बाद मंगलवार को उन्नाव गैंगरेप पीड़िता, उनकी मां और महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने दिल्ली के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने न्याय की मांग उठाई और सेंगर को राहत दिए जाने पर सवाल खड़े किए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया। इस कार्रवाई को लेकर भी विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई और कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति जताना नागरिकों का अधिकार है।
पीड़िता का गंभीर आरोप
उन्नाव गैंगरेप पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कुलदीप सेंगर को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जमानत दी गई है। पीड़िता ने यह भी याद दिलाया कि इस मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में, जब वह अपने वकील और परिजनों के साथ यात्रा कर रही थीं, तब बिना नंबर प्लेट वाले ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में पीड़िता और उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि उनकी दो मौसियों की मौत हो गई थी। इस मामले में भी सेंगर पर साजिश के आरोप लगे थे, हालांकि वर्ष 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था।
न्याय व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
कुलदीप सेंगर को मिली राहत और उसके बाद की घटनाओं ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या प्रभावशाली आरोपियों को कानून के तहत समान सजा मिल पा रही है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि पीड़िताओं को सम्मान, सुरक्षा और त्वरित न्याय मिलना चाहिए, न कि डर और अपमान। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आगे अदालतें और सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती हैं।




