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Monday, March 2, 2026
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प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा के समय में बदलाव, अब रात नहीं दिन में मिलेंगे दर्शन, जानें क्‍या है समय ?

प्रेमानंद महाराज की लोकप्रिय पदयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। अब प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा का समय बदल दिया गया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । प्रेमानंद महाराज देश के उन संतों में गिने जाते हैं, जिनकी लोकप्रियता आम श्रद्धालुओं से लेकर नामी हस्तियों तक फैली हुई है। उनसे मिलने के लिए रोज बड़ी संख्या में भक्त आश्रम पहुंचते हैं। खासतौर पर उनकी रात में निकलने वाली पदयात्रा को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता था। अब उनकी पदयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। 

दरअसल, प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा का समय बदल दिया गया है, जिससे भक्तों को अब देर रात तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नए समय के अनुसार, महाराज अब दिन के निर्धारित समय पर पदयात्रा में निकलेंगे। जो भक्त प्रेमानंद महाराज के दर्शन करना चाहते हैं और उनकी पदयात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें अब नए तय किए गए समय के अनुसार अपनी योजना बनानी होगी। यह बदलाव श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा का बदला समय 

प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा का समय अब बदल दिया गया है। पहले यह यात्रा रात करीब 2 बजे शुरू होती थी, लेकिन अब वह शाम 5 बजे पदयात्रा पर निकलेंगे। इस बदलाव से भक्तों को देर रात तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह पदयात्रा वृंदावन में स्थित श्रीकृष्ण शरणम् फ्लैट से प्रारंभ होकर श्री राधा केलिकुंज आश्रम तक जाती है। लगभग दो किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाराज के दर्शन के लिए पहले से कतार में खड़े नजर आते हैं। बदले हुए समय से अब और अधिक भक्त सहज रूप से इस आध्यात्मिक यात्रा में शामिल हो सकेंगे।

कौन हैं संत प्रेमानंद महाराज

संत प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है। परिवार में पहले से ही भक्ति और धार्मिक संस्कारों का वातावरण था, जिसका गहरा असर उनके व्यक्तित्व पर पड़ा। आध्यात्मिक मार्ग को अपनाने के लिए उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग किया और वाराणसी पहुंच गए, जहां उन्होंने संन्यास जीवन की शुरुआत की। यहीं से उनका जीवन पूरी तरह साधना और भक्ति को समर्पित हो गया। 

प्रेमानंद महाराज ने अपने गुरु सद्गुरु देव की सेवा में दस वर्षों से अधिक समय बिताया। गुरु कृपा और श्री वृंदावन धाम के आध्यात्मिक प्रभाव से उनका मन पूरी तरह सहचरी भाव में रच-बस गया। इसी साधना के फलस्वरूप उनके भीतर श्री राधा रानी के चरणों के प्रति गहन और अटूट भक्ति विकसित हुई, जिसने उनके जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की।

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