नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पंजाब में बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। अब तक 1300 से ज्यादा गांव पानी में डूब चुके हैं। लाखों लोग बेघर हो गए और हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। कई सड़कें, पुल और घर भी क्षतिग्रस्त हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। पंजाब को भारत का ‘अन्न का कटोरा’ कहा जाता है। यह एक उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है। लेकिन मानसून में यहां हर साल बाढ़ की समस्या सामने आती है। इसका सबसे बड़ा कारण है ऊपरी इलाकों यानी हिमालय और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और मैदानी इलाकों में पानी भर जाता है।
कौन सी नदियां हैं जिम्मेदार
पंजाब से होकर पांच प्रमुख नदियां बहती हैं, सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब, झेलम ये सभी नदियां हिमालय से निकलती हैं। भारी बारिश और बर्फ पिघलने से इनमें अचानक पानी बढ़ जाता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है। सतलुज नदी, जो तिब्बत के मानसरोवर से निकलती है, पंजाब के कई जिलों (रोपड़, लुधियाना, फिरोजपुर) से होकर गुजरती है। भाखड़ा बांध से जब अतिरिक्त पानी छोड़ा जाता है तो नदी किनारे बसे गांवों और शहरों में पानी घुस जाता है। इसी वजह से सतलुज को पंजाब में बाढ़ का मुख्य कारण माना जाता है।
डैम और कैचमेंट एरिया का असर
ऊपरी इलाकों में बारिश होने से कैचमेंट एरिया भर जाता है। यहां जमा पानी नदियों में जाता है और जलस्तर बढ़ा देता है। जब डैम से पानी छोड़ा जाता है तो डाउनस्ट्रीम में बहाव और तेज हो जाता है, जिससे बाढ़ की स्थिति और बिगड़ जाती है। केवल बारिश और नदियां ही नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही भी बाढ़ की बड़ी वजह है। शहरीकरण की गलत प्लानिंग नदियों के किनारे अतिक्रम जल निकासी और सीवर सिस्टम की सफाई का अभाव इन कारणों से बारिश का पानी सड़कों और घरों में भर जाता है। सरकार ने तटबंधों को मजबूत करने, डैम से पानी का बहाव नियंत्रित करने और राहत सामग्री पहुंचाने जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन अभी भी यह प्रयास बाढ़ की समस्या को पूरी तरह हल नहीं कर पाए हैं।





