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Friday, March 13, 2026
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प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, SC ने कहा-अभिव्यक्ति की आज़ादी है, लेकिन…

अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और सरकार को SIT गठित करने का निर्देश दिया है।

SC ने कहा – अभी टिप्पणी क्यों? समय की संवेदनशीलता समझनी चाहिए

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी जरूर है, लेकिन हाल ही में हुए आतंकी हमले जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित भाषा और सही समय का ध्यान रखना चाहिए।

‘प्रोफेसर को मिली राहत, लेकिन कुछ शर्तों के साथ’

सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर महमूदाबाद को CJM सोनीपत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड भरने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, प्रोफेसर फिलहाल इस मामले से जुड़ी कोई पोस्ट, लेख या भाषण नहीं देंगे। पासपोर्ट जमा कराना होगा। भारत में हाल ही में हुए आतंकी हमले या जवाबी कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। SIT जांच होगी 3 सदस्यों की टीम में महिला अफसर भी जरूरी कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि 24 घंटे के भीतर तीन वरिष्ठ अधिकारियों की SIT टीम बनाई जाए। टीम में दिल्ली या हरियाणा से बाहर के अधिकारी हों। एक महिला अफसर भी टीम में शामिल हो। टीम का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (IG) करेंगे। प्रोफेसर अली खान की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि “उनका पोस्ट देशभक्ति से भरा हुआ था। उन्होंने जय हिंद लिखकर अपनी बात खत्म की। उन्होंने कोई सांप्रदायिक बात नहीं कही।

SC ने पूछा – महिलाओं का अपमान कहां है?

महिला आयोग द्वारा दर्ज दूसरी FIR पर कोर्ट ने सवाल किया। जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि “हमें दिखाइए कि कहां उन्होंने महिला सैन्य अधिकारियों का अपमान किया? सिर्फ आरोप से नहीं चलेगा, सबूत चाहिए। ASG राजू ने जवाब में कहा कि प्रोफेसर ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कुछ टिप्पणियां की हैं, जिन्हें जांचा जाएगा।

कोर्ट की सलाह – राय देने में संतुलन ज़रूरी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “कोई भी अपनी राय रख सकता है, लेकिन उसे देने के समय और शब्दों का चयन ऐसा हो कि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।” इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाता दिखा। प्रोफेसर अली खान को राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी रहेगी।

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