नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भर्तृहरि महताब के नाम पर प्रोटेम स्पीकर की मोहर लग गयी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी इस पद के लिए नियुक्ति की है। भर्तृहरि महताब ओडिशा से बीजेपी सांसद हैं। उन्हें लोकसभा में स्थायी स्पीकर की नियुक्ति होने तक स्पीकर की जिम्मेदारी निभानी होगी। वह 7वीं बार सांसद बने हैं। भर्तृहरि महताब ने इसी साल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजू जनता दल (BJD) छोड़करबीजेपी को ज्वाइन किया था।
वाद विवाद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संसद रत्न पुरस्कार से भी नवाजा गया है
उन्होंने बीजू जनता दल (BJD) छोड़ते समय पार्टी पर आरोप लगाए थे कि बीजू जनता दल ने उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने का मौका नहीं दिया था। जिसके बाद सब कयास लगा रहे थे कि भर्तृहरि महताब बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। जो कि बिलकुल सही साबित हुआ। भर्तृहरि महताब को वर्ष 2017 में उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार भी मिला है। इसके अलावा उन्हें वाद विवाद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संसद रत्न पुरस्कार से भी नवाजा गया है।
प्रोटेम स्पीकर लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करता है
संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा स्पीकर का पद नई लोकसभा की पहली बैठक के लिए रिक्त रहता है। इस अवस्था में लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी को सदन के ही एक सदस्य को निभानी पड़ती है। इसके लिए सत्ताधारी पार्टी सदन के किसी एक सदस्य का नाम प्रोटेम स्पीकर के लिए संसदीय मामलों केमंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजती है। जिसके बाद राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति हो जाती है। ये ही प्रोटेम स्पीकर लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करता है।
जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर का पद खत्म हो जाता है
भतृहरि महताब 18वीं लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर हैं, वह लोकसभा के नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक सारी जिम्मेदारी को निभाएंगे। प्रोटेम स्पीकर के रूप में वह अपनी सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यानि लोकसभा के सभी सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। जब तक नए लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक प्रोटेम स्पीकर भतृहरि महताब रोजमर्रा की कार्यवाही करवाएंगे। प्रोटेम स्पीकर को इसके बाद लोकसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के चुनाव और मतदान की जिम्मेदारी निभानी होगी। जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर का पद खत्म हो जाता है।
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