नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। MCD मेयर चुनाव से पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भाजपा के नेता कांग्रेस में शामिल हो गये हैं। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने करावल नगर और गांधी नगर विधानसभा क्षेत्रों के आप और बीजेपी के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में शामिल होने पर स्वागत किया। चुनाव से ठीक पहले नेताओं के पाला बदलने से दिल्ली की सियासत में हलचल मच गई है।
दिल्ली के राजीव भवन में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में AAP और BJP के कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। कांग्रेस में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में सतीश डेढ़ा (पूर्व सलाहकार, ओबीसी आयोग), यश सिंह (आम आदमी पार्टी यूथ विंग के आयोजन सचिव, करावल नगर), श्मोहित डेढ़ा (बीजेपी डूसू प्रभारी, करावल नगर), रोहित शर्मा, रोव, हाफिज अंसारी, सुभाष खरोलिया, राजा, सलीम फरीदी, पूनम अरोड़ा, मुन्नी बाजी, रेखा झा, मनोज तंवर, राजेश मिश्रा, किरण कश्यप, सुभाष गौर और एसरिल कुरैशी समेत कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं। बता दें कि इन लोगों को पार्टी में शामिल करने में गांधी नगर से कांग्रेस के विधायक उम्मीदवार कमल अरोड़ा और करावल नगर से डॉ. पी.के. मिश्रा की बड़ी भूमिका रही।
कांग्रेस वादों को निभाने वाली पार्टी : देवेंद्र यादव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवेंद्र यादव ने कहा कि आज लोग कांग्रेस में शामिल हुए हैं, वे पार्टी की विकासपरक नीतियों से प्रभावित होकर आये हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वादों को निभाने वाली पार्टी है। उन्होंने AAP और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि AAP ने जनता से केवल झूठे वादे किए और धोखा दिया है। जबकि भाजपा से जनता का मोहभंग हो चुका है।देवेंद्र यादव ने दावा किया कि आने वाले समय में इन पार्टियों से और भी कार्यकर्ता और नेता कांग्रेस में शामिल होंगे।
AAP और BJP पर बोला तीखा हमला
देवेंद्र यादव ने कांग्रेस में शामिल हुए नए साथियों का स्वागत करते हुए आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता अब AAP की भ्रष्ट नीतियों और दिखावटी वादों से परेशान हो चुकी है। अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों को सिर्फ सुनहरे सपने दिखाए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो शिक्षा, न स्वास्थ्य और न ही साफ पानी जैसी ज़रूरी सुविधाओं में सुधार किया। दूसरी ओर, बीजेपी ने केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग कर दिल्ली के लोगों का विश्वास तोड़ा और विकास के नाम पर सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ साधे। इन दोनों दलों की नाकामी और आंतरिक असंतोष के चलते अब इनके नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ने को मजबूर हो रहे हैं।





