नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महिलाओं के खिलाफ देश में बढ़ रहे अत्याचारों को लेकर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में सख्त नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को हम तभी सुरक्षित रख सकते हैं जब इन अत्याचारों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाए।
महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार चिंता का विषय है
उन्होंने कहा कि आज महिलाओं के खिलाफ हो रहे आत्याचार और बच्चों की सुरक्षा समाज के लिए चिंताजनक विषय हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में सख्त नियम बनाए गए हैं लेकिन हमें और सक्रिय होने की जरूरत है। इन मामलों में जिनती जल्दी निर्णय लिए जाएंगे उतनी जल्दी हम आधी आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे। जिला न्यायपालिका की नेशनल कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृतकाल में 140 करोड़ भारतवासियों का एक ही सपना है विकसित भारत नया भारत। इस नजरिये का एक मुख्य स्तंभ न्यायपालिका भी है।
न्याय में देरी खत्म करने के लिए कई स्तर पर काम हुए
उन्होंने कहा कि न्याय में देरी को खत्म करने के लिए बीते एक दशक में कई स्तर पर काम हुए हैं। पिछले 10 सालों में देश ने ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 8 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पिछले 25 साल में जितनी राशि ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गई, उसका 75 प्रतिशत पिछले 10 सालों में ही हुआ है। भारतीय न्याय संहिता के रूप में हमें नया भारतीय न्याय विधान मिला है। इन कानूनों की भावना है- ‘Citizen First, Dignity First and Justice First।’ हमारे क्रिमिनल लॉ शासक और गुलाम वाली colonial सोच से आजाद हुए हैं।
आधुनिकीकरण के लिए मिशन स्तर पर काम किया जा रहा है
पिछले 10 सालों में अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए मिशन स्तर पर काम किया जा रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अगले दो दिनों में लंबित मामलों के प्रबंधन, मानव संसाधन और कानूनी बिरादरी की बेहतरी समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसमें ‘न्यायिक कल्याण’ पर एक सत्र भी शामिल किया गया है।





