नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद शीतकालीन सत्र के दौरान शनिवार को लोकसभा को संबोधित किया । लोकसभा में संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान की अब तक की यात्रा की प्रशंसा करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए जश्न मनाने का क्षण है। मुझे खुशी है कि संसद भी इस जश्न में शामिल हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए एक असाधारण उपलब्धि है। जब देश आजाद हुआ, तो उसने सभी उम्मीदों को तोड़ दिया था लेकिन संविधान ने हमें इस मुकाम पर पहुंचाया है। मैं उन नागरिकों को भी नमन करता हूं जिन्होंने हमारी संविधान सभा के विजन को मूर्त रूप दिया है।
पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी रहा भारत का इतिहास
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने यह नहीं सोचा कि भारत 1947 में आजाद हुआ, बल्कि वे देश की प्राचीन संस्कृति से अवगत थे। दुनिया के लिए हमारा इतिहास प्रेरणादायी रहा है। इसलिए आज भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वे संविधान सभा की महिला सदस्यों की सक्रिय भूमिका को भी स्वीकार करते हैं। उनके सुझाव संविधान के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे।
महिलाओं की भागीदारी इस देश के लिए गर्व की बात रही है
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जब जी-20 शिखर सम्मेलन हुआ, तो हम दुनिया के सामने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का विचार लेकर आए। हमें इससे भी आगे बढ़ने की जरूरत है। आज हम देख रहे हैं कि हर बड़े नीतिगत फैसले के केंद्र में हमने महिलाओं को लाया है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आज हमारे देश की मुखिया एक आदिवासी महिला है। इस संसद सहित हर क्षेत्र में महिलाओं की संख्या भी बढ़ रही है।
विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए देश की एकता की जरूरत
उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। जब हम आजादी के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाएंगे, तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि देश ‘विकसित भारत’ बने। इस मील के पत्थर के लिए सबसे महत्वपूर्ण है देश की एकता। उन्होंने कहा कि मुझे दुख के साथ यह कहना होगा कि स्वार्थ के कारण आजादी के बाद देश की एकता पर हमला किया गया है। जो लोग गुलाम मानसिकता के साथ पले-बढ़े, उन्होंने विविधता में विरोधाभास तलाशे।
अनुच्छेद 370 भारत की एकता में बाधा थी
मोदी ने कहा कि अगर आप मेरी सरकार की नीतियों को देखेंगे तो पाएंगे कि हमने देश की एकता को मजबूत करने की कोशिश की है। अनुच्छेद 370 इस एकता में बाधा थी। इसलिए हमने इसे हटा दिया। पीएम मोदी ने ‘आर्थिक एकता’ का भी जिक्र किया और कहा कि जीएसटी ने इसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के गरीब लोगों को अगर मुफ्त इलाज मिले तो वे सशक्त होंगे। इसलिए हमने ‘एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य कार्ड’ लाने का फैसला किया।
कांग्रेस के माथे से आपातकाल का पाप कभी नहीं मिट सकता
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कांग्रेस शासनकाल पर भी निशाना साधा । उन्होंने कहा कि आज संविधान के 75 साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन अगर हम पिछली उपलब्धियों को देखें तो जब संविधान के 25 साल पूरे हो रहे थे, तब आपातकाल लगाया गया था। संवैधानिक अधिकारों को नकारा गया और देश को एक बड़ी जेल में बदल दिया गया। मोदी ने कहा कि कांग्रेस के माथे से आपातकाल का पाप कभी नहीं मिट सकता। जब संविधान के 50 साल पूरे हुए, तब अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता में थे और इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। मैं भी भाग्यशाली था कि मैं उस साल गुजरात का मुख्यमंत्री भी बना। मैंने उसी समय तय किया कि हम संविधान की 60वीं वर्षगांठ मनाएंगे।
कांग्रेस सरकार ने संसद को अंधेरे में रखते हुए धारा 35A लगाई
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने हर कदम पर संविधान की अवहेलना की है। लोग अनुच्छेद 370 के बारे में जानते हैं, लेकिन धारा 35A के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने इसे संसद में लाए बिना ही लागू कर दिया, जिसे अंधेरे में रखा गया। कांग्रेस ने तो डॉ. अंबेडकर से भी द्वेष रखा। जब अटलजी सत्ता में थे, तो सरकार ने उन्हें स्मारक बनाकर सम्मानित करने का फैसला किया, लेकिन यूपीए ने सुनिश्चित किया कि यह परियोजना आगे न बढ़े। जब हम 2014 में सत्ता में आए, तो हमने सुनिश्चित किया कि स्मारक अलीपुर रोड पर बनाया जाए। संविधान के साथ बार-बार छेड़छाड़ की गई। पीएम मोदी ने कहा कि गांधी की अगली पीढ़ी भी संविधान के साथ छेड़छाड़ करने की इस प्रक्रिया में लगी हुई है।
जब कांग्रेस सरकार हटी, तभी ओबीसी को आरक्षण मिला
पीएम मोदी ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति से ग्रस्त लोगों ने आरक्षण के साथ भी खिलवाड़ किया, जिसके कारण अंततः इस देश में एससी, एसटी और ओबीसी के लोग वंचित हो गए। जब डॉ. अंबेडकर ने आरक्षण की मांग की, तो कांग्रेस ने शुरू में इसका विरोध किया। उन्होंने मंडल आयोग की रिपोर्ट की अवहेलना की। जब कांग्रेस सरकार हटी, तभी ओबीसी को आरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि जब संविधान बनाया जा रहा था, तब संविधान सभा में इस बात पर बहस हुई कि क्या धार्मिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। यह निर्णय लिया गया कि ऐसा कदम देश की एकता के लिए हानिकारक होगा। हालांकि, अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए कांग्रेस ने बिना परवाह किए आगे बढ़ गई।





