नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ट्रेन के थर्ड एसी में सफर करना अब यात्रियों को खूब पसंद आ रहा है। हाल ही में जारी बजट पेपर के अनुसार थर्ड कोच में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या पिछले पांच सालों में करीब ढाई गुना तक बढ़ गई है, यह वर्ष 2019-20 में 11 करोड़ थी, जो कि 2024-25 में बढ़कर 26 करोड़ हो गई है।
भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा का अच्छे से ध्यान रखता है। रेल से हर रोज करोड़ों लोग सफर करते हैं। लोगों को जब कहीं दूर सफर करना होता है तो वे फ्लाइट की बजाए ट्रेन में आराम से बैठकर ट्रेवल करना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि ट्रेन का सफर अधिक आरामदायक और सुविधाजनक भी होता है। सभी ट्रेनों स्लीपर, फर्स्ट AC, सेकंड AC और थर्ड AC कोच होते हैं। लेकिन इनमें से यात्रियों का सबसे ज्यादा पसंदीदा कोच थर्ड AC बन गया है।
फर्स्ट और सेकंड AC भी अब प्रायॉरिटी में नहीं
हाल ही में जारी हुए आंकड़ों पर नजर डालें तो यात्री सबसे ज्यादा थर्ड AC में ही सफर कर रहे हैं। 2019-20 में 11 करोड़ एसी 3-टीयर यात्रियों (कुल यात्रियों का 1.4 प्रतिशत) से, 2024-25 में एसी 3-टीयर यात्रियों की संख्या लगभग 19 प्रतिशत सीएजीआर से 26 करोड़ हो गई है। ऐसे में फर्स्ट और सेकंड AC भी अब प्रायॉरिटी में नहीं है।
AC डिब्बों में थर्ड एसी है सबसे सस्ता
थर्ड AC कोच अन्य एसी कोच की तुलना में सस्ता होता है। यही कारण है कि इसमें सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एसी कोच में सबसे ज्यादा महंगी टिकट फर्स्ट एसी कोच की होती है। इसके बाद सेकंड एसी का किराया और आखिरी में थर्ड एसी का किराया सबसे कम होता है।
सफर में चादर-तकिया ले जाने की झंझट खत्म
थर्ड एसी में सफर करने वाले यात्रियों को स्लीपर से ज्यादा सुविधाएं मिलती हैं। लंबी दूरी की यात्रा में लोग रात के सफर के लिए थर्ड एसी को ही प्रायोरटी देते हैं। इस कोच में यात्रियों को चादर, तकिया और कंबल मिलता है, इससे यात्रियों को अपने बैग में इन्हें रखने की जरूरत नहीं होती।
रेलवे की हो रही है इतनी आमदनी
जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे ने पिछले दो सालों में देश में चलने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा थर्ड एसी के डिब्बे बढ़ाए हैं। जिसका सीधा असर रेलवे की कमाई पर पड़ा है। रेलवे ने इस वित्तीय वर्ष में सबसे ज्यादा थर्ड एसी के यात्रियों से राजस्व प्राप्त किया है। रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान पूरे देश में थर्ड एसी के यात्रियों से 30 हजार 88 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया है।




