जयपुर, 24 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि कोरोना महामारी ने भारतीय जीवनशैली को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है। लोगों ने योग, प्राणायाम, आयुर्वेद को नजदीक से समझा है और भारतीय संस्कृति के अनुरूप इन आयामों को अपनाकर अपनी जीवनशैली को बदला है। लोगों ने उचित आहार एवं नियमित दिनचर्या अपनाकर इस महामारी का मुकाबला किया है। अनियमित दिनचर्या एवं जीवनशैली के कारण कोरोना का प्रकोप ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरों में ज्यादा रहा है। हम सभी स्वस्थ नियमित दिनचर्या अपनाकर, इस दिशा में कार्य करें तो स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। स्वांत रंजन बुधवार रात आभासी मंच पर आयोजित "वैश्विक महामारी: कोरोना, चुनौती और समाधान" नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। स्वदेशी जागरण मंच, जयपुर प्रांत के तत्वावधान में प्रकाशित यह पुस्तक विद्वान लेखकों के आलेखों का संकलन है। स्वांत रंजन ने कहा कि दतोपंत ठेंगड़ी ने जो राह वर्षों पहले दिखाई, हमें उसी पर आगे बढ़ कर, अग्रसर और उन्नत होना है। भारत में कोरोना ने अर्थ और शिक्षा को विशेष रूप से प्रभावित किया है। हमें इनमें सुधार करने की जरूरत है। हमारे देश के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, आयुर्वेदाचार्यों ने शोध करके कोरोना महामारी के बचाव व रोग के निदान के लिए विशेष कार्य किया है और अनेक दवाई, वैक्सीन बनाई है। जहां जहां चुनौती आई, वहां पर भारत ने सामना करते हुए नये नये तरीके से अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा कि पेटेंट फ्री वैक्सीन स्वदेशी जागरण मंच का महत्वपूर्ण अभियान है, हम सभी को अभियान का समर्थन करना चाहिए। स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह विचार विभाग प्रमुख डॉ. राजकुमार चतुर्वेदी ने पुस्तक की प्रस्तावना के बारे में प्रकाश डालते हुए बताया कि कोरोना महामारी और वैश्विक संकट कितना गंभीर बना हुआ है, इसका उल्लेख इस पुस्तक में है। इस महामारी ने विकास की परिभाषा बदल दी है। प्रत्येक भारतीय की इस महामारी में क्या भूमिका हो, इस बात की विवेचना इस पुस्तक में है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए। इस अवसर पर चौधरी बंशीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी, हरियाणा के कुलपति और स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख प्रोफेसर राजकुमार मित्तल ने कहा कि कोरोना महामारी से बचाव का तरीका शत-प्रतिशत टीकाकरण है। विश्व को बचाना है तो 787 करोड़ लोगों का टीकाकरण किस तरह करवाया जावे, इस पर गहनता से विचार किया जाना चाहिए। इन सभी को वैक्सीनेशन के लिए 1500 करोड़ डोज टीकों की जरूरत होगी, अकेले भारत को 200 करोड़ डोज टीके चाहिए। पूरे विश्व का टीकाकरण करण करने में दो वर्ष से अधिक का समय लग सकता है। वर्तमान गति एवं योजना के अनुसार भारत की 70 प्रतिशत आबादी को इस वर्ष के अंत तक टीकाकरण संभव है। वैक्सीनेशन की गति बढ़ाने, कीमतें कम करने और सर्वाधिक टीकाकरण करने का एकमात्र उपाय टीकों का अधिकाधिक उत्पादन है। इस मार्ग में सर्वाधिक बाधा पेटेंट कानून हैं, जिसकी वजह से पेटेंट स्वामित्व वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अतिरिक्त अन्य कंपनियां उत्पादन नहीं कर सकती हैं। विश्व के विकसित देशों ने अपने यहां उत्पादित टीकों को 90 प्रतिशत पूर्व में आरक्षित कर अपने देश की 90 प्रतिशत जनता का टीकाकरण कर लिया है जबकि विश्व के अधिकांश गरीब एवं विकासशील देशों की 10 प्रतिशत जनता को अभी तक टीका नहीं लगा है। इसलिए भारत और अफ्रीका महाद्वीप के 100 से अधिक देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूटीओ) में वैक्सीन और कोरोना की दवाइयों को पेटेंट फ्री करने के लिए एक याचिका प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसके समर्थन में भारत में स्वदेशी जागरण मंच एवं अनेक देशों के एनजीओ पूरी दृढ़ता के साथ डिजिटल याचिका हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। इन सभी पेटेंट फ्री पोस्टर प्रदर्शन, डिजिटल याचिका हस्ताक्षर अभियान सहित अन्य कार्यों का प्रभाव आगामी डब्ल्यूटीओ और ट्रिप्स की बैठक एवं निर्णयों में हमें देखने को मिलेगा।




