नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ी बात कही है, जहां उन्होनें कहा, सेनाओं को हर समय सतर्क रहना होगा। युद्ध के लिए शस्त्र और शास्त्र यानी हथियार और ज्ञान दोनों को जरूरी बताया है। शुक्रवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है, सेना को 24×7, 365 दिन हर हाल में तैयार रहना पड़ता है उन्होंने बल दिया कि युद्ध केवल शस्त्र से नहीं, शास्त्र यानी ज्ञान से भी लड़ा जाता है। सेना को हर समय पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।
CDS जनरल अनिल चौहान ने बताया कि आज का युद्ध पारंपरिक और आधुनिक तरीकों का मिश्रण है, जिसमें काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक दोनों ही रणनीतियां शामिल हैं। यानी हथियार आधारित और जानकारी आधारित दोनों ही रणनीतियां शामिल है। यह पहली, दूसरी और तीसरी पीढ़ी के युद्ध तकनीकों का समन्वय है।
ऑपरेशन सिंदूर की संसद में दी गई जानकारी
गुरुवार को केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि, ऑपरेशन सिंदूर 7 मई को शुरू किया गया था, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई थी। राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि, ऑपरेशन आतंक के ढांचे को नष्ट करने और आतंकियों को मार गिराने पर केंद्रित था। भारत की कार्रवाई केंद्रित, मापी हुई और उकसावे से बचने वाली थी।
क्या ऑपरेशन सिंदूर अंतरराष्ट्रीय दबाव में शुरू हुआ?
सरकार से पूछा गया कि, क्या ऑपरेशन सिंदूर अंतरराष्ट्रीय दबाव में शुरू किया गया? तो विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि, यह भारत की स्वतःस्फूर्त और ठोस प्रतिक्रिया थी। इसमें पाकिस्तान ने भारतीय नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की , लेकिन भारत की सेनाओं ने सभी बड़े हमलों को नाकाम कर दिया।
भारतीय हमले में पाकिस्तान को बड़ा नुकसान
इस ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित जैश-ए-मोहम्मद, हिज़बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के करीब नौ ठिकानों को नष्ट किया और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस और मिलिट्री ठिकानों पर भी हमला किया। खासकर जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की।
10 मई को हुआ युद्धविराम
चार दिन की लगातार जवाबी कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर युद्धविराम का प्रस्ताव रखा जहां दोनों देशों के सहमति के बाद 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी।





