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Saturday, March 21, 2026
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Hathras Stampede: सिर्फ कुंवारी लड़कियां बन सकती थीं सूरज पाल की शिष्या, बाबा से लेनी होती थी ‘विशेष दीक्षा’

बाबा सूरज पाल को लेकर नया खुलासा हुआ है। जिसमें बताया गया है कि सिर्फ कुंवारी लड़कियां ही बाबा की शिष्या बन सकती थीं। इसके लिए उन्हें बाबा से विशेष दीक्षा लेनी होती थी।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सूरज पाल जाटव उर्फ नारायण साकार हरि को लेकर आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अब बाबा के बारे में कुछ नई जानकारी सामने आई है। जिसमें बताया गया है कि सत्संग में बाबा हमेशा कुंवारी लड़कियों से घिरा रहता था। बाबा को लाल रंग पसंद था। इसलिए इन लड़कियों को आयोजन समिति की ओर से स्पेशल लाल पोशाक दी जाती थी। ये खुलासा सूरज पाल के सत्संग में जाने वाली महिलाओं ने किया है। 

कुंवारी लड़कियों को दी जाती थी लाल पोशाक

प्रतिष्ठित न्यूज चैनल आजतक की रिपोर्ट में बताया गया है कि आयोजन समिति की तरफ से दी गई वहीं पोशाक पहनकर लड़कियां सत्संग में जाती थीं और नृत्य करती थीं। सत्संग के दौरान बाबा हमेशा काला चश्मा पहना करता था। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि उन लड़कियों को सूरजपाल के चश्में में भगवान का रूप दिखता था। इसके अलावा सत्संग में जाने वाली महिलाओं ने बताया कि सूरजपाल के आसपास हमेशा रहने वाली कुंवारी लड़कियां उसे अपना पति मानती थीं और उसके साथ वैसे ही रहती थीं। ये लड़कियां सूरज पाल का बहुत सम्मान करती थीं और उनकी एक पुकार पर कुछ भी करने को तैयार रहती थीं।

कुंवारी लड़कियां ही बन सकती थी शिष्या

सूरजपाल के एक अनुयायी ने बताया कि बाबा के आश्रम और संस्थान में महिलाओं की श्रेणियां तय थीं। कुंवारी लड़कियां ही शिष्याएं थी। इसके लिए लड़कियों को बाबा से विशेष दीक्षा लेनी पड़ती थी। वहीं सुहागिन महिलाओं को सूरजपाल में भोले बाबा के दर्शन होते थे। वो शादीशुदा महिलाओं को अपने पास भी नहीं आने देता था।

सूरजपाल का सारा काम करती थीं लड़कियां

आश्रम के आसपास रहने वाले लोगों के हवाले से आजतक ने लिखा है कि सूरजपाल का सारा काम वो लड़कियां ही करती थीं जिन्हें उसने शिष्या बनाया था। उसके नहाने से लेककर खाना खिलाने तक सारा काम उनसे ही करवाया जाता था। ये भी बताया गया कि सूरजपाल इन शिष्याओं को हमेशा अपने आसपास ही रखता था।

बता दें कि हाथरस में सूरजपाल के सत्संग में भगदड़ मच जाने के चलते 121 लोगों की मौत हो गई थी। जिसको लेकर सूबे में काफी हंगामा मचा। जिसके बाद सरकार ने इसकी जांच के लिए एक एसआईटी गठित की। एसआईटी रिपोर्ट में सत्संग के आयोजनकर्ताओं को इस भगदड़ का जिम्मेदार बताया गया, लेकिन बाबा को इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई।

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