नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। NEET परीक्षा को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ग्रेस मार्क्स पाने वाले 1563 छात्रों को फिर से परीक्षा देनी होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिलिंग पर रोक लगाने से इनकार किया है। जिसको लेकर 2 हफ्ते में जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इसकी अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच कर रही सुनवाई
बता दें कि जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच नीट यूजी के मामले में सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपनी कई मांगों को लेकर याचिका डाली गई थी। जिसको लेकर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 1563 छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का आदेश दिया है।
क्या है मामला?
5 मई को आयोजित नीट की परीक्षा का रिजल्ट 4 जून को घोषित किया गया था। इस परीक्षा में 67 बच्चों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इन 67 बच्चों में से 8 बच्चों का परीक्षा सेंटर एक ही जगह था। जिसके बाद छात्रों ने इसपर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
टाइम ऑफ लॉस की वजह से दिए गए ग्रेस मार्क्स
इस मामले में NTA ने जवाब देते हुए कहा कि एक गलत सवाल की वजह से इतने बच्चों के फुल मार्क्स मिले हैं। पूरे नंबर पाने वाले 67 बच्चों में से 44 बच्चों को एक गलत सवाल के लिए अलग से नंबर दिए गए। इसके अलावा 1563 बच्चों को लॉस ऑफ टाइम की वजह से ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं। क्योंकि इन बच्चों की परीक्षा किसी कारणवस समय से शुरू नहीं हो सकी थी। जिसके बाद लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में 3 याचिकाएं दायर की।
इन याचिकाओं में से एक याचिका फिजिक्सवाला के सीईओ अलख पांडे ने दायर की है। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि एनटीए के द्वारा ग्रेस मार्क्स देने का फैसला मनमाना है। इसके अलावा दो अन्य लोगों ने भी सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों को लेकर याचिका दायर की है। जिसको लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
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