नई दिल्ली, 21 मई (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अस्पतालों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे कुछ खास लोगों के लिए अस्पतालों में बेड आरक्षित करने की जरूरत है। जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कोरोना मरीजों को बेड आवंटित करने में पारदर्शिता की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अब अस्पताल में मरीजों के लिए बेड की कमी नहीं है। कोर्ट ने इस याचिका को कोरोना मामलों से जुड़ी दूसरी याचिकाओं के साथ टैग कर दिया। याचिका मनजीत सिंह ने दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से वकील विवेक सूद और अनीष चावला ने कहा कि दिल्ली में कोरोना मरीजों के बेड के आवंटन के लिए एक केंद्रीकृत मेकैनिज्म बनाने की जरूरत है। इस मेकैनिज्म के जरिये अगर किसी मरीज को अपने इलाके के अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहा है तो उसे दूसरे इलाके के अस्पताल में बेड मिल सकता है। याचिका में कहा गया है कि संकट की इस घड़ी में अस्पताल वीआईपी कल्चर का पालन कर रहे हैं। जो मरीज अस्पताल में पहले पहुंचे उन्हें पहले भर्ती किया जाना चाहिए। अस्पतालों को इस बात का रिकार्ड रखना चाहिए कि कौन सा मरीज कब आया। पारदर्शिता बरतने के लिए अगर मरीज को बेड उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो उसकी वजह बताई जानी चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/ संजय/ पवन




