नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के रायसेन में गली से निकलने की मामूली बात पर दो समुदायों में खूनी संघर्ष पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने मामले पर संज्ञान लेते हुए हाल ही में घटनास्थल का दौरा किया, जिसके बाद अपनी एक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर चर्चा की है। एनसीपीसीआर ने सांप्रदायिक हिंसा की आयोग की जांच के संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है, संबंधित मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए सभी संबंधितों को आवश्यक निर्देश जारी करें और 20 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एनसीपीसीआर के साथ साझा की जाए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि घटना में पुलिस द्वारा कार्रवाई उचित तौर पर नहीं की गई, जिसके कारण फायरिंग की घटना में बच्चे घायल हुए हैं। इसलिए आयोग ने इस मामले की गृह सचिव स्तर पर उच्चस्तरीय जांच कर रिपोर्ट को 15 दिनों के भीतर पेश करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, 19 मार्च को रायसेन जिले के ग्राम खमरिया में दो समुदायों के बीच हिंसा में नाबालिक बच्चों के घायल होने की सूचना आयोग को मिली, जिसके आधार पर आयोग के अध्यक्ष ने 20 मार्च को घायल बच्चों से भोपाल के हमीदिया अस्पताल में जाकर मुलाकात की और 21 मार्च को घटना स्थल का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया गया है कि 16 वर्षीय बच्चे की आंख फायरिंग में चोटिल हुई है। आयोग ने हमीदिया अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को निर्देश दिया है कि वह बच्चे की हर सप्ताह मेडिकल बुलेटिन आयोग को देंगे और बच्चे के इलाज में जो सुविधा दी जा सके उसे दिया जाए। इसके अलावा घायल बच्चे को एक लाख रुपये की तत्काल राहत दिए जाने को लेकर मध्यप्रदेश मुख्य सचिव को कहा गया है और बच्चे का पूरा इलाज होने तक एक पुनर्वास कार्य योजना आयोग को 10 दिन के अंदर पेश करने को भी कहा है। साथ ही अस्पताल में भर्ती एक बच्चे की पढ़ाई में भी सरकार छूट दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों से बात कर बच्चे को राहत देने का कार्य करने के भी निर्देश आयोग की तरफ से दिए गए हैं। वहीं भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज करा रहे तीन अन्य बच्चों को एक-एक लाख रुपये की राहत देने के निर्देश दिए गए हैं। संप्रदायिक हिंसा में घायल बच्चों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट भी आयोग के सामने पेश करने को कहा गया है। –आईएएनएस एमएसके




