नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा में बुधवार रात दो बजे मणिपुर संकट पर चर्चा हुई। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव रखा, जिसे 3:40 बजे अनुमोदित कर दिया गया। इस चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की, जिन्होंने राज्य की स्थिति को गंभीर बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
कई विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मणिपुर में 250 से अधिक मौतें और 70 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष और डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
गृह मंत्री अमित शाह का जवाब
गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान कहा कि मणिपुर में हिंसा का मुख्य कारण हाईकोर्ट का एक फैसला था, जिसने दो समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता राज्य में शांति बहाल करना है। राहत शिविरों में भोजन, दवाइयों और शिक्षा की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन
गृह मंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि मणिपुर में संविधान के अनुच्छेद 356 (1) के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों के साथ अलग-अलग बैठकें हुई हैं और जल्द ही एक संयुक्त बैठक की जाएगी।
मणिपुर का वर्तमान संकट
मणिपुर में मई 2023 में जातीय हिंसा भड़की थी, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। सरकार का कहना है कि जल्द ही हालात सामान्य कर लोकतांत्रिक सरकार की बहाली की जाएगी।





