नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्यसभा में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 97 मिनट का भाषण बिना किसी ठोस तथ्य के था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई संतोषजनक जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई। खरगे के अनुसार, भाषण में सिर्फ सरकारी उपलब्धियों का ब्योरा और घोषणाओं का लंबा वर्णन था, लेकिन वास्तविक समस्याओं और विपक्ष के सवालों का समाधान नहीं दिया गया।
खरगे ने कहा- संसद में पीएम मोदी ने विपक्ष की बातों को अनसुना किया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक ढंग से संसद नहीं चलाना चाहती। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री जी के भाषण पर प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। लेकिन फिर भी जितनी घटिया बातें उन्होंने बोली हैं, उन पर मैं जरूर जवाब देना चाहता हूं, क्योंकि झूठी बातों को दोहराना उनका हमेशा से काम रहा है। संसद में उनके 97 मिनट के भाषण में हमारी बातों पर एक भी उत्तर नहीं दिया गया। केवल 100 साल, 75 साल और 50 साल पुराने मुद्दों की बातें दोहराई गईं।
खरगे ने कहा- संसद में जनरल नरवणे की किताब को नकारना विशेषाधिकार हनन
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य सरकार के सदस्य यह बोल रहे थे कि जनरल एम एम नरवणे की पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि किताब वास्तव में मौजूद है। उन्होंने कहा कि किताब होने के बावजूद सदन में इसे नकारना विशेषाधिकार हनन के बराबर है। खरगे ने सवाल किया, “जो मुद्दे हमने उठाए, आप (प्रधानमंत्री) उसका जवाब दीजिए। वह कहते हैं कि मुझे दो-दो किलो गालियां देते हैं। क्या गालियां तोलते हैं?
खरगे का आरोप- पीएम मोदी सिखों, दलितों और आदिवासियों का सम्मान नहीं करते
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिखों, दलितों और आदिवासियों का सम्मान नहीं करते। यह आरोप ऐसे समय आया जब गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दल लगातार मिल रही चुनावी हार को पचा नहीं पा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष उनके प्रति गहरी नफरत रखता है, लेकिन वह कभी उनकी “कब्र नहीं खोद पाएगा क्योंकि करोड़ों भारतीयों का आशीर्वाद उनका कवच है।”
पीएम मोदी का विपक्ष पर आरोप- राष्ट्रपति और संविधान का अपमान
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकसभा में विपक्षी सदस्यों द्वारा पैदा किए गए व्यवधान सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक अपमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक आदिवासी और महिला राष्ट्रपति का अपमान होने के साथ-साथ उनके सर्वोच्च संवैधानिक पद और भारत के संविधान का भी अपमान है।





