नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (10 जनवरी 2026) को I-PAC मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ईडी ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में दखल देने का आरोप लगाया है। ईडी का दावा है कि कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंचकर ईडी अधिकारियों से अहम फाइलें, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन छीन लिए। एजेंसी का कहना है कि इस कार्रवाई से जांच प्रक्रिया बाधित हुई।
I-PAC केस: ED पहले कोलकाता HC पहुंची, अब SC में भी याचिका
I-PAC मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को पहले कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर बुधवार (14 जनवरी 2026) को सुनवाई होनी है। ईडी ने अदालत को बताया कि जांच में जानबूझकर रुकावट डाली गई, जिससे एजेंसी का काम प्रभावित हुआ। अपनी याचिका में ईडी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही एजेंसी ने अदालत से इस संबंध में केस दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।
ED से टकराव के बीच ममता सरकार ने SC में दाखिल की कैविएट
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के साथ जारी खींचतान के बीच पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने शनिवार (10 जनवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। कैविएट के जरिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इस मामले में किसी भी याचिका या अपील पर राज्य का पक्ष सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए। सरकार का कहना है कि उसका यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि किसी भी एकतरफा फैसले से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा मौका मिले।
क्या है ED और ममता सरकार के बीच पूरा विवाद?
दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (8 जनवरी 2026) को कोयला घोटाला मामले में राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास और ऑफिस पर छापेमारी की थी। ईडी की कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहले प्रतीक जैन के घर और फिर उनके ऑफिस पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान कुछ अहम फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज निकालकर मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखवाए गए, जिसे लेकर अब मामला तूल पकड़ चुका है।





