नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । जन्माष्टमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण को ‘माखनचोर’ कहे जाने को एक भ्रामक धारणा बताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का माखन प्रेम केवल बाल लीलाओं की चंचलता नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय और अत्याचार के खिलाफ प्रतीकात्मक संदेश था। इस गलत टैग को हटाने और जनमानस में सही संदेश फैलाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्माष्टमी के मौके पर एक अहम घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार एक विशेष सामाजिक जागरूकता अभियान शुरू करेगी।
‘माखनचोर’ नहीं, न्याय के प्रतीक थे श्रीकृष्ण- सीएम मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण को ‘माखनचोर’ कहे जाने को उनके चरित्र की गलत व्याख्या बताया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का माखन चुराना कोई शरारत नहीं, बल्कि अत्याचार के खिलाफ प्रतीकात्मक विद्रोह था। बाल सखाओं के साथ मिलकर उन्होंने यह संदेश दिया कि उत्पीड़कों को जनसाधारण के अधिकारों से वंचित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि समाज इस ऐतिहासिक भ्रांति को सुधारें और श्रीकृष्ण के आदर्शों को उनके सही संदर्भ में समझें।
श्रीकृष्ण की सही छवि के लिए प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाएगी सरकार
मध्य प्रदेश सरकार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों में श्रीकृष्ण के ‘माखन प्रेम’ के पीछे छिपे सामाजिक संदेश और सही सही तथ्यों को उजागर किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल न केवल धार्मिक चेतना को सशक्त करेगी, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समझ को भी गहराई देगी। सरकार चाहती है कि श्रीकृष्ण को केवल एक चंचल बालक नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक, विचारक और युग प्रवर्तक के रूप में पहचाना जाए।




