नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इन दिनों संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है, इस सत्र में पिछले दो दिनों से विपक्ष गौतम अडानी और मणिपुर के मुद्दे पर सवाल उठा रहा है, इतना ही नहीं खासकर कांग्रेस अडानी मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही को नहीं चलने दे रही जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी है। अब इस अडानी मुद्दे पर भारतीय गठबंधन में फूट पड़ती नजर आ रही है। यह बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि जहां कांग्रेस अमेरिका में कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी मामले में उद्योगपति गौतम अडानी को दोषी ठहराने का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने निंदा की है और कहा है कि उसका ध्यान पश्चिम बंगाल को केंद्रीय निधि से वंचित करने पर है।
अडानी मामले पर TMC का बयान
टीएमसी ने कहा, हम सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे और ‘एकल मुद्दे’ की कार्रवाई में समय बर्बाद नहीं करना चाहते। लोकसभा उपनेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि टीएमसी इस मुद्दे को संसद में उठाने के लिए ‘सार्वजनिक मुद्दों’ पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी। टीएमसी नेता का कहना था कि हम नहीं चाहते कि संसद बाधित हो। जनता हमें यहां अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखने एवं उनके समाधान खोजने के लिए भेजती है, यदि सदन ही नहीं चलेगा और रोज-रोज बाधित होता रहेगा तो हम अपने मुद्दे उठाएंगे कैसे। इसलिए हमारा यह मानना है कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलनी चाहिए। दूसरी ओर इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीएमसी संसद चलाना चाहती है पर हम चाहते हैं कि इस सरकार की कई विफलताओं की जिम्मेदारी सामने आए और वह इसी तरह से संभव है, जैसा कि आप होते हुए यहां देख रहे हैं।
TMC अपने मुद्दों पर करना चाहती है चर्चा
दूसरी ओर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने संसद के इस शीतकालीन सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा करने के लिए जो सूची तैयार की है, वह चाहती है कि इस पर सदन में बात हो। पार्टी जिस मुख्य मुद्दे को उठाने की योजना बना रही है वह राज्य के लिए मनरेगा और अन्य केंद्रीय निधियों को रोकना है, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और उर्वरकों की कमी जैसे मुद्दे भी तृणमूल कांग्रेस ने अपनी सूची में शामिल किए हैं।





