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Tuesday, March 17, 2026
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CM योगी के समर्थन में अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने छोड़ी नौकरी, बोले- अपमान बर्दाश्त नहीं

यूपी स्थित बरेली में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद अब अयोध्या में जीएसटी विभाग के अधिकारी प्रशांत सिंह ने नौकरी छोड़ दी है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद अब अयोध्या से एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश जीएसटी विभाग, अयोध्या मंडल में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा सीधे राज्यपाल को भेजा है।

CM योगी के समर्थन में छोड़ी नौकरी

प्रशांत कुमार सिंह ने अपने इस्तीफे में साफ लिखा है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ शंकराचार्य द्वारा की गई कथित अभद्र टिप्पणी से आहत हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए नेता हैं और उनका इस तरह अपमान किया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा,“जिस प्रदेश का मैं नमक खाता हूं, जिस प्रदेश से मुझे वेतन मिलता है, मैं उसका पक्षधर हूं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपमान मैं किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं कर सकता।

पत्नी को फोन कर बताया फैसला

इस्तीफा देने के बाद प्रशांत सिंह ने सबसे पहले अपनी पत्नी को फोन किया और भावुक होकर बताया कि उन्होंने सीएम योगी के समर्थन में नौकरी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह नैतिक और व्यक्तिगत आधार पर लिया गया है। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से मानसिक रूप से परेशान थे। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही उनका इस्तीफा स्वीकार होगा, वे अपने निजी संसाधनों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

इस्तीफे में क्या लिखा?

प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि वे उत्तर प्रदेश सरकार के एक साधारण कर्मचारी हैं सरकार से मिलने वाली आजीविका से उनके परिवार का पालन-पोषण होता है ऐसे में उनका राजकीय धर्म बनता है कि सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई अनर्गल टिप्पणी का विरोध करें। शंकराचार्य की टिप्पणी को उन्होंने राज्य, संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ बताया इसी कारण उन्होंने सरकार के पक्ष में और शंकराचार्य के विरोध में त्यागपत्र दिया है।

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