नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । संसद के शीतकालीन सत्र का पांचवां दिन अडानी और संभल मुद्दे पर विपक्षी दलों के लगातार किए हंगामे की भेंट चढ़ गया। पिछले दिनों की तरह शुक्रवार को भी सत्र की शुरुआत से कांग्रेस ने राज्यसभा और लोकसभा में अडानी मुद्दे पर चर्चा की मांग की। दोपहर 12 बजे तक दोबारा बैठक के बाद भी स्थिति नहीं ठीक हुई तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति, उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी। हंगामे के कारण दोनों ही सदनों में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल पाए। अब आगामी बैठक अगले सोमवार को सुबह 11 बजे होगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच कहा कि देश की जनता चाहती है कि सदन की कार्यवाही चले। उन्होंने यह टिप्पणी प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों से सदन की बैठक चलने देने की अपील करते हुए की थी
“असहमति भारतीय लोकतंत्र की ताकत”
बिरला ने इस दौरान नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों को बहुत समझाया और कहा कि कई माननीय विद्वानों ने लिखा है कि संसद चलनी चाहिए, चर्चा-संवाद होना चाहिए। सहमति और असहमति भारतीय लोकतंत्र की ताकत है। पर उनकी कहीं बातों का संसद सदस्यों पर कोई असर नहीं होता देख और हंगामा नहीं थमने पर लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न करीब 11 बजकर 10 मिनट पर, फिर पुनः संवेत होने पर हंगामे के चलते दोपहर 12 बजे तक और उसके बाद आगे तक का लिए स्थगित कर दी।
पार्टी सदस्यों ने ट्रेजरी बेंच से जवाबदेही की मांग की
आज संसद के दोनों सदन अडानी मुद्दे, उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद,महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर हंगामेदार रहे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने ट्रेजरी बेंच से जवाबदेही की मांग की।विपक्ष सरकार पर दबाव बनाए हुए है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अडानी, संभल और मणिपुर पर चर्चा से बच रही है जब सरकार संसद को चलने नहीं देना चाहती तो बैठक का काम कैसे चल सकता है? राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को अडानी मामले, संभल की हिंसा को लेकर कुल 17 नोटिस सौंपे गए, लेकिन, उन्होंने उन सभी को खारिज कर दिया।
सभापति उनमें से किसी पर भी चर्चा करने को राजी नहीं हुए
विपक्ष ने अडानी की रिश्वतखोरी, संभल और मणिपुर में कानून व्यवस्था की स्थिति, दिल्ली में बढ़ते अपराध, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले, इस्कॉन भिक्षु की गिरफ्तारी से संबंधित विभिन्न नोटिस दिए गए हैं। सभापति उनमें से किसी पर भी चर्चा करने को राजी नहीं हुए, जिसके चलते विपक्ष ने भारी हंगामा शुरू कर दिया। धनखड़ ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में विरोध प्रदर्शन के कारण काफी समय बर्बाद हुआ है।
उधर, शपथ ग्रहण के एक दिन बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आज लोकसभा पहुंच कर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं और इस विरोध के बीच में ही उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्षी पार्टियों के सांसदों से मुलाकात की और उनका अभिनंदन स्वीकार किया।





